जैनाचार्य महाश्रमण का ब्यावर में मंगल प्रवेश:देश-विदेश से उमड़े श्रद्धालु, नगर में अध्यात्म का संगम

तेरापंथ धर्म संघ के संघनायक जैनाचार्य महाश्रमण का शनिवार को ब्यावर में मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु, श्रावक-श्राविकाएं और जैन व जैनेतर समाजजन उनकी एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़े। नगर में आध्यात्मिक माहौल बन गया। विहार मार्ग और मंगल प्रवेश मार्ग पर भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के चरणों की रज प्राप्त करने का प्रयास किया। जैनाचार्य महाश्रमण ने सभी को आशीर्वाद दिया। उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार ने हाल ही में उन्हें राज्य मेहमान घोषित किया है। इससे पहले देश के पांच अन्य राज्यों द्वारा भी उन्हें यह सम्मान दिया जा चुका है। जैनाचार्य महाश्रमण लाखों किलोमीटर की पदयात्रा कर देश-विदेश में व्यसन मुक्ति का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने 36 कौम के लाखों लोगों को व्यसन मुक्त कर अहिंसा, अनुशासन और संयम का प्रचार किया है। समारोह संयोजक गौतम गोखरू ने बताया कि शनिवार सुबह एक रिसॉर्ट से गुरुदेव ने पैदल विहार प्रारंभ किया। उनके साथ लगभग 100 साधु-साध्वियों का संघ और हजारों श्रद्धालु जयघोष करते हुए जैन जवाहर भवन पहुंचे। विहार के दौरान 36 कौम के महिला-पुरुषों ने वंदन कर आशीर्वाद लिया।
शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला एवं पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। ब्यावर सीओ राजेश कसाना, सीआई आशुतोष पाण्डे और ट्रैफिक इंचार्ज मंगल सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारी व्यवस्थाओं में लगे रहे। जैनाचार्य महाश्रमण ने पार्श्वनाथ अस्पताल परिसर में भी प्रवास किया। उन्होंने महा साध्वी रत्ना उमराव कंवर महाराज की स्मृति में यहां दिव्य पगलिए किए। लगभग 15 मिनट के प्रवास के दौरान उन्होंने ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष तुलसी बोथरा और महामंत्री कमलेश मोदी से अस्पताल की गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने मानव सेवा को सर्वोच्च धर्म बताते हुए संस्था के कार्यों की सराहना की। अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों ने भी उनका अभिनंदन किया। विराट धर्मसभा में जीवन मूल्यों का संदेश जैन जवाहर भवन के नानेश रत्नम पंडाल में आयोजित विराट धर्मसभा में महाश्रमण ने कहा कि मानव जीवन दुर्लभ और अनमोल है, इसका सम्यक उपयोग करना चाहिए। विवेकपूर्ण जीवन ही श्रेष्ठ धर्म है। धर्म जीने की सही कला सिखाता है। उन्होंने कथनी और करनी में एकरूपता, संयमित आहार–विहार, इच्छाओं की सीमा तथा सामायिक साधना पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जिस घर में धर्म और ध्यान होता है, वहां सुख–शांति का वास रहता है। सामायिक से मन का साधन होता है और जीवन का उत्थान संभव है। इस अवसर पर साध्वी प्रमुखा विश्रुत , संत दिनेश मुनि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। चातुर्मास एवं मर्यादा महोत्सव की पुरजोर विनती
धर्मसभा के दौरान तेरापंथ संघ, महिला मंडल, युवा मंडल तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से पूज्य महाश्रमण जी से ब्यावर में आगामी चातुर्मास एवं मर्यादा महोत्सव आयोजित करने की पुरजोर विनती की गई। रविवार को लाडनूं के लिए विहार पूज्य गुरुदेव रविवार प्रातः ब्यावर से लाडनूं के लिए विहार करेंगे। पूरे आयोजन में तेरापंथ संघ अध्यक्ष धनराज रांका, मंत्री रमेश श्रीश्रीमाल, समारोह संयोजक गौतम गोखरू, सह संयोजक मनीष रांका, अशोक रांका, पुखराज बड़ोला, नेमीचंद सुराणा सहित श्रीसंघ, युवा संघ एवं महिला मंडल के कार्यकर्ता सेवा, सत्कार और व्यवस्थाओं में समर्पित भाव से जुटे रहे।

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