जैसलमेर में कुरजां (डेमोइसेल क्रेन) के बाद अब गिद्ध और कोयल की भी मौत हो गई। आशंका जताई जा रही है कि बर्ड फ्लू अन्य पक्षियों में भी फैल रहा है। शनिवार को भी 4 कुरजां मृत मिली। अब तक 32 कुरजां की मौत हो चुकी है। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉक्टर उमेश व्रंगतिवार ने बताया- उन्होंने कहा- शनिवार को देगराय और बांकलसर इलाके में चार कुरजां मृत मिलीं। वहीं देगराय इलाके में ही दो गिद्ध और एक कोयल के शव मिले। इनमें एक गिद्ध की मौत तारों से टकराकर हुई, शवों को प्रोटोकॉल के लिहाज से दफनाया गया। गिद्ध और कोयल के शवों के सैंपल लेकर भोपाल भिजवाए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही गिद्ध और कायल की मौत के कारणों का खुलासा होगा। क्या होता है बर्ड फ्लू?
बर्ड फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है। यह आमतौर पर पक्षियों और जानवरों में फैलता है। कई बार यह संक्रमण जानवरों के जरिए इंसानों में भी फैल सकता है। बर्ड फ्लू के कई वेरिएंट काफी घातक होते हैं। हालांकि, H9N2 के मामले में बहुत गंभीर समस्याएं देखने को नहीं मिली है। इन्फ्लूएंजा वायरस 4 तरह का होता है, इन्फ्लूएंजा A, B, C और D। इनमें से ज्यादातर एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करते हैं। हालांकि A (H5N1) और A (H7N9) से इंसानों के संक्रमित होने का खतरा रहता है। अब A (H9N2) नए खतरे के रूप में सामने आया है। बर्ड फ्लू के लक्षण क्या?
बर्ड फ्लू सबसे अधिक रेस्पिरेटरी सिस्टम को प्रभवित करता है। इसके लक्षण किस तरह नजर आते हैं, आइए ग्राफिक में देखते हैं- बर्ड फ्लू कैसे फैलता है?
बर्ड फ्लू पक्षियों में पाए जाने वाले इन्फ्लूएंजा वायरस के जरिए फैलता है। अभी तक इंसानों में इसके एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने के मामले सामने नहीं आए हैं। फिर भी एक्सपर्ट को डर है कि कभी भी कोई ऐसा म्यूटेंट आ सकता है, जो इंसानों से इंसानों में फैल सकता है। बर्ड फ्लू कितनी खतरनाक बीमारी है
साल 1997 में हॉन्गकॉन्ग में एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस का इंसानों में पहला केस मिला था। यह H5N1 था और इसका डेथ रेट करीब 60% था यानी इससे प्रभावित 10 में से 6 लोगों की मौत हो रही थी। क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, बर्ड फ्लू अब तक की बेहद घातक बीमारियों में से एक है। दुनिया में इसका डेथ रेट 50% से ज्यादा है। इसका मतलब है कि बर्ड फ्लू से पीड़ित 10 लोगों में से 5 की मौत हो जाती है। बर्ड फ्लू के जिस नए वेरिएंट H9N2 को लेकर हम बात कर रहे हैं, इसकी पक्षियों में मृत्यु दर 65% के करीब है। इंसानों में अभी इसके बहुत मामले देखने को नहीं मिले हैं। जो मामले मिले हैं, उनमें यह ज्यादा घातक साबित नहीं हुआ है। क्या है बर्ड फ्लू के रिस्क फैक्टर्स?
इंफ्लूएंजा वायरस कई दिनों तक जीवित रह सकता है। H9N2 से संक्रमित पक्षी 10 दिनों तक मल और लार के जरिए वायरस फैला सकते हैं। इन्फेक्टेड सर्फेस को छूने से भी संक्रमण फैल सकता है। … बर्ड फ्लू से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… 1. जैसलमेर में बर्ड फ्लू ने बढ़ाई दहशत:उड़ते-उड़ते अचानक खेत में गिरे 14 कुरजां, मौत; मरने वाले पक्षियों की संख्या 28 हुई जैसलमेर में बर्ड फ्लू ने बढ़ाई दहशत: उड़ते-उड़ते अचानक खेत में गिरे 14 कुरजां, मौत; मरने वाले पक्षियों की संख्या 28 हुई। जैसलमेर में कुरजां (डेमोइसेल क्रेन) पक्षियों के मरने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार सुबह उड़ते हुए कुरजां अचानक से खेत में गिर गई और थोड़ी देर में ही 14 पक्षियों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। पढ़ें पूरी खबर … 2. मृत पक्षी का शव मिले तो उसे हाथ नहीं लगाएं:बर्ड फ्लू इंसानों में भी फैलने का खतरा, अब तक 14 पक्षियों की मौत जैसलमेर में H5N1 एवियन फ्लू (बर्ड फ्लू) की पुष्टि के बाद प्रशासन अलर्ट है। अब इस बीमारी के पशुओं और इंसानों में फैलने से रोकने के लिए प्रशासन बीमारी के प्रोटोकॉल के बीच पक्षियों के शव को दफन कर रहा है। प्रशासन अलर्ट हो गया है। सभी आम नागरिकों से भी अपील की है कि अगर किसी को मृत पक्षी का शव मिलता है तो उसे हाथ नहीं लगाएं। ( पढ़ें पूरी खबर ) 3. राजस्थान में कुरजां पक्षियों में मिला बर्ड फ्लू संक्रमण:भोपाल से आई जांच रिपोर्ट में खुलासा; जैसलमेर में मृत मिले थे 8 प्रवासी पक्षी जैसलमेर में पिछले दिनों मृत मिले कुरजां पक्षियों (डेमोइसेल क्रेन) की मौत बर्ड फ्लू से हुई है। भोपाल लैब से बुधवार को आई जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट में कुरजां पक्षियों की मौत का कारण बर्ड फ्लू बताया गया है। लैब से आई रिपोर्ट के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है। ( पढ़ें पूरी खबर )


