बलरामपुर में फर्जी आंगनबाड़ी नियुक्तियां रद्द:कलेक्टर ने जांच के बाद पात्र अभ्यर्थियों को दी नई नियुक्ति, मामले में कई गिरफ्तार, जेल भेजे गए

बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड में चार आंगनबाड़ी सहायिकाओं की नियुक्तियां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रद्द कर दी गई है। कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज राजेंद्र कटारा ने अपील प्रकरण में इन नियुक्तियों को निरस्त किया। निष्पक्ष जांच के बाद अब पात्र अभ्यर्थियों को नई नियुक्तियां दी गई हैं। जिन आंगनबाड़ी केंद्रों में नियुक्तियां रद्द की गईं, उनमें बहेराटोली, कटहरपारा, धाजापाठ और डूमरपानी शामिल हैं। अरमाना, रिजवाना, प्रियंका यादव और सुशीला सिंह की नियुक्तियां फर्जी पाई गई थी। कलेक्टर के निर्देश पर परियोजना अधिकारी, एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना शंकरगढ़ ने 15 दिनों के भीतर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्त किया। इसके तहत बहेराटोली में गायत्री पैकरा, कटहरपारा में अंजली तिर्की, धाजापाठ में सुषमा रवि और डूमरपानी में उर्मिला उरांव को आंगनबाड़ी सहायिका नियुक्त किया गया है। कलेक्टर से की थी भर्ती में फर्जीवाड़े की शिकायत यह पूरा मामला तब सामने आया जब आंगनबाड़ी केंद्र बहेराटोली की अभ्यर्थी गायत्री पैकरा ने अगस्त 2025 में जनदर्शन के दौरान कलेक्टर के समक्ष भर्ती में हुए फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत की। कलेक्टर ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी और अनुविभागीय अधिकारी शंकरगढ़ को विस्तृत जांच के निर्देश दिए। इसके बाद बीईओ कुसमी, शंकरगढ़ और राजपुर को शामिल कर एक संयुक्त जांच दल गठित किया गया। भर्ती प्रक्रिया में मिली गड़बड़ी, दोषियों पर FIR की सिफारिश जांच दल ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े प्रत्येक दस्तावेज की बारीकी से जांच की और विभिन्न कार्यालयों से समन्वय कर उनका सत्यापन कराया। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और नियुक्तियां निरस्त करने की अनुशंसा की गई। प्रतिवेदन प्राप्त होने पर कलेक्टर ने तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। फर्जी अंकसूचियों के मामले में कई गिरफ्तार थाना शंकरगढ़ में अरमाना, रिजवाना, प्रियंका, सुशीला सहित अन्य के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी अंकसूचियां अजीजी पब्लिक स्कूल भगवतपुर और कुसमी से जारी की गई थी। इसके बाद समसुद्दीन अंसारी, उसके पुत्र आबिद अंसारी, पुत्री शाहिना परवीन सहित अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी शंकरगढ़ करुण डहरिया और जांच दल के अधिकारियों ने त्वरित और निष्पक्ष भूमिका निभाई।

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