बांसवाड़ा के जिला हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद युवती की मौत हो गई। परिजनों ने सर्जन पर लापरवाही का आरोप लगाया। जांच कमेटी बनी, जिसकी रिपोर्ट में एक डॉक्टर को दोषी पाया गया है। हालांकि ऑपरेशन में जिला हॉस्पिटल के पीएमओ भी शामिल थे, लेकिन उन्हें क्लीन चिट दे दी गई। परिजनों का दावा है कि जांच कमेटी पीएमओ को बचा रही है। इस बीच मृतका के पिता की ओर से 12 नवंबर को जांच में दोषी डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत के आधार पर ऑपरेशन में शामिल एक डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। बांसवाड़ा कोतवाली थानाधिकारी बुधाराम बिशनोई ने बताया- जांच कमेटी में दोषी पाए गए सर्जन के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। फिलहाल जांच चल रही हैं। पहले पढ़िए पूरा मामला
4 नवम्बर को गढ़ी क्षेत्र के रैयाना निवासी मुस्कान (20) पुत्री ध्रुवशंकर यादव को पेट में दर्द की शिकायत हुई। उसे इलाज के लिए महात्मा गांधी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। उसका पथरी का ऑपरेशन हुआ, लेकिन 8 दिन बाद 11 नवम्बर को उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए थे। इस जटिल ऑपरेशन के दौरान हॉस्पिटल के पीएमओ डॉ. दिनेश माहेश्वरी बतौर सर्जन टीम के साथ ओटी में शामिल थे। जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई पर उठे सवाल
परिजनों के आक्रोश को देखते हुए कलेक्टर ने एसडीएम सोनू कुमारी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की। करीब डेढ़ महीने बाद लंबी जांच के बाद कमेटी ने रिपोर्ट दी। इसके बाद ऑपरेशन करने वाले सर्जन हितेन व्यास के खिलाफ मामला दर्ज किया है। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान टीम में 2 विशेषज्ञ सर्जन मौजूद थे। इसके बाद भी सिर्फ एक को ही दोषी ठहराया गया है। उनका कहना है कि जिस ऑपरेशन में खुद पीएमओ डॉ. दिनेश माहेश्वरी शामिल थे, वहां हुई चूक की जिम्मेदारी सामूहिक स्तर पर तय क्यों नहीं की गई? पीएमओ बोले- मैं ओटी में असिस्टेंट सर्जन था
मामले में पीएमओ डॉ. दिनेश माहेश्वरी का कहना है कि वह ऑपरेशन में सिर्फ असिस्टेंट सर्जन शामिल हुए थे। उनका मामले में संबंध नहीं है। संयुक्त निदेशक प्रकाश शर्मा का कहना है कि पीएमओ को क्लीन चिट देने के बारे में जानकारी नहीं है। कलेक्टर के निर्देश पर जांच कमेटी गठित हुई थी, इसकी रिपोर्ट सीधे सरकार को जाती है। मामला गंभीर है, उच्चस्तरीय कमेटी से भी जांच करवाएंगे।


