राष्ट्र माता सावित्रीबाई फुले की जयंती लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट में धूमधाम से मनाई गई। यह कार्यक्रम एच.जी खुराना ऑडिटोरियम लाइब्रेरी में आयोजित किया गया।इस अवसर पर संस्थान के सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने सावित्रीबाई फुले के जीवन संघर्षों और उनके योगदान के बारे में बताया। सावित्रीबाई फुले को भारत की पहली महिला शिक्षिका और प्रधानाध्यापिका के रूप में जाना जाता है। उन्होंने ऐसे समय में लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया जब महिलाओं की शिक्षा को समाज में वर्जित माना जाता था। उन्होंने 1848 में पुणे के भिड़ेवाड़ा में लड़कियों के लिए भारत का पहला स्कूल खोला। शिक्षा समाज में बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम उन्होंने अपने पति महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर महिलाओं के अधिकारों और जातिगत भेदभाव के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया। उनका मानना था कि शिक्षा केवल साक्षरता नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम है।प्लेग जैसी महामारी के दौरान उन्होंने बीमार लोगों की निस्वार्थ सेवा की, जिसके कारण वे स्वयं संक्रमित हो गईं और उनका निधन हो गया। वे एक कुशल कवयित्री भी थीं; उनकी रचनाओं, जैसे ‘काव्य फुले’, ने लोगों को शिक्षा और स्वावलंबन के लिए प्रेरित किया। ये लोग शामिल हुए जयंती समारोह के दौरान नारी शिक्षा और सशक्तिकरण पर एक नाटक का मंचन भी किया गया। उपस्थित लोगों को माता सावित्रीबाई फुले की पुस्तकें भेंट की गईं। इस कार्यक्रम में डॉ. अवधेश कुमार, ललित मोगा, लता सचान, मंजू लता राव, सीमा, संगीता, विमला चौहान, मंजू सिंह, अमित श्रीवास्तव, अरविंद कुमार, डॉ. अंजू सिंह, ओम प्रकाश, चंदन कुमार, अमरनाथ और यूट्यूबर किशोर कुमार पगला सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।


