भास्कर इनसाइट सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (एसएसबी) में अब एमआरआई और सीटी स्कैन की सुविधा 24 घंटे रहेगी। सभी विभागों की ओपीडी भी अब सातों दिन रहेगी। एसएसबी में करीब 12 करोड़ की लागत से स्टॉक यूनिट की स्थापना कर न्यूरो कैथ लैब लगाई जाएगी ताकि लकवा मरीजों को तत्काल राहत मिल सके। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने शनिवार को एसएसबी की समीक्षा बैठक के बाद यह निर्देश दिए हैं। उन्होंंने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि एसएसबी में बैठने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों की ओपीडी सप्ताह में तीन दिन रहेगी। एंडोक्राइनोलॉजी विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टर को छह दिन ओर गेस्ट्रो और न्यूरो में भी विशेषज्ञ डॉक्टर्स 3-3 दिन ओपीडी की सेवाएं देंगे। पहले दो दिन ही बैठते थे विशेषज्ञ। एसएसबी में विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टर्स यथा प्लास्टिक सर्जरी, गैस्ट्रो सर्जरी इत्यादि सेवाओं की जानकारी देने के लिए बड़े बोर्ड लगेंगे, जिन पर डॉक्टरों के फोन नंबर भी होंगे। ड्रेस कोर्ड को सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एसएसबी में सुधार और बेहतर प्रबंधन को लेकर सभी विभागाध्यक्षों से 5-5 सुझाव मांगे गए हैं। पीबीएम में दवाओं के ठेकों में ब्लैक लिस्टेड फर्मों को ऑथोराइजेशन देने के सवाल पर गोदारा ने डॉ. घीया को चेक करने के निर्देश दिए। इस दौरान एसपीएमसी प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र कुमार वर्मा, पीबीएम अस्पताल अधीक्षक डॉ. बीसी घीया तथा एसएसबी अधीक्षक डॉ. संजीव बुरी उपस्थित रहे। मंत्री ने एसएसबी में मीटिंग ली, क्योंकि यहीं पर डीसी ने अधीक्षक को डिफेम किया था कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा का सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में डॉक्टरों की मीटिंग लेने के पीछे बड़ा कारण छिपा है। दरअसल 19 दिसंबर को एसएसबी की मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी की बैठक संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा की अध्यक्षता में हुई थी। उस बैठक में पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला समस्याओं का ज्ञापन देने पहुंचे। तब संभागीय आयुक्त ने पीबीएम अधीक्षक डॉ. बीसी घीया को कमजोर कड़ी बता दिया। यह बात चिकित्सा समुदाय को चुभ गई। मामला मंत्री सुमित गोदारा तक पहुंचा। उसका असर शनिवार को नजर आया। प्रेस कांफ्रेंस में भास्कर के सवाल पर मंत्री ने पीबीएम अधीक्षक डॉ. घीया का मान बढ़ाते हुए कहा कि कमिश्नर को बिना सोचे, बिना किसी तथ्य के ऐसे बोलने का कोई अधिकार नहीं है। कमिश्नर वो आदमी है, जो सरकार के ऑर्डर फॉलो करता है। उन्होंने गलत बोला। मीटिंग में एसएसबी अधीक्षक सहित गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, एंडोक्रइनोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट निशाने पर रहे। हालांकि मीटिंग को लेकर डॉक्टरों के बीच चर्चा भी मेडिसिन के पेशे से जुड़ी बड़ी रोचक थी।


