भास्कर न्यूज | दुमका दुमका: मनरेगा का नाम बदलकर वीबी ग्राम जी योजना किए जाने पर कांग्रेसियों में खासी नाराजगी है। पार्टी ने पांच जनवरी को रांची में लोक भवन का घेराव का एलान किया है। मौके पर अध्यक्ष स्टेफन हांसदा, प्रो. मनोज अंबष्ठ, महेशराम चंद्रवंशी व महबूब आलम आदि मौजूद थे। शनिवार को पार्टी कार्यालय में कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि आज की तारीख में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार को गरीबों के दर्द का एहसास नहीं है। केंद्र सरकार गरीब विरोधी है। यह सरकार गरीबों की हितकारी कभी नहीं रही। अडानी अंबानी जैसे लोगों के संरक्षण के लिए यह सरकार बनी है। इसलिए इन्हें गरीबों का दर्द क्या पता होगा। कहा कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना की मूल भावना के विपरीत वर्तमान भारत की सरकार ने वी बी ग्राम जी योजना प्रारंभ की है जो मजदूर विरोधी है। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी और जनहितकारी योजना की मूल भावना के खिलाफ यह योजना लाई गई है। यह योजना मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों को छीनने वाली है तथा ग्राम सभा और पंचायत की स्वायत्तता को कमजोर करती है। महात्मा गांधी की कल्पना ग्राम स्वराज और विकेंद्रीकरण की थी, जबकि नई योजना इसके ठीक विपरीत है। इससे गांवों की निर्णय लेने की शक्ति समाप्त हो जाएगी। कहा कि 60:40 की हिस्सेदारी के कारण झारखंड पर हर साल लगभग 1500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जिसे राज्य सरकार वहन नहीं कर सकती। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने इसे वैकल्पिक योजना बनाकर राज्यों पर थोपने का प्रयास किया है। यह नई योजना मजदूरों को काम की गारंटी नहीं देती। काम का चयन भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर नहीं किया गया है, जिससे रोजगार के अवसर और घटेंगे। कहा कि 2005 में यूपीए सरकार ने मनरेगा को एक कानून के रूप में लागू किया था, जो केवल रोजगार योजना नहीं बल्कि गरीबों को काम का संवैधानिक अधिकार देने वाला एक्ट था।


