बार एसोसिएशन का शपथ समारोह:विधानसभा अध्यक्ष देवनानी 45 साल पुरानी हाईकोर्ट बेंच की मांग पर फिर दे गए आश्वासन

बार एसोसिएशन की 22 दिन पहले बनी नई कार्यकारिणी ने शनिवार को शपथ ली। मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अधिवक्ताओं को समाज की महत्वपूर्ण धुरी बताया। कहा कि न्याय के प्रति विश्वास कायम रखने में उनकी विशेष भूमिका है। इसलिए काम में शुचिता, सौहार्द और संवेदनशीलता को शामिल कर पीड़ित-जरूरतमंदों को सस्ता-सुलभ न्याय दिलाएं। समारोह यहां आरएनटी मेडिकल कॉलेज के न्यू ऑडिटोरियम में हुआ। बार पदाधिकारियों ने विधानसभा अध्यक्ष से उदयपुर में हाईकोर्ट बेंच की लंबित मांग पूरी कराने में सहयोग की अपील की। देवनानी ने कहा कि वह बार प्रतिनिधिमंडल के जयपुर आने पर मुख्यमंत्री, कानून मंत्री से मुलाकात करवाएंगे। अपनी ओर से सिफारिश भी रखेंगे। हैरानी और मलाल ये है कि अधिवक्ता 45 साल से यह मांग कर रहे हैं। हर बार स्थानीय और यहां आने वाले नेता-मंत्री आश्वासन दे जाते हैं। कोशिश नहीं करते। ऐसे में सवाल यह है कि क्या विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, कानूनी मंत्री जैसे जिम्मेदार इस काम के लिए खुद पसीना नहीं बहा सकते? क्या आदिवासी बहुल उदयपुर को हाईकोर्ट बेंच दिलाना इनकी नैतिक जिम्मेदारी नहीं है? साढ़े 4 दशक में कई विधानसभा अध्यक्ष, कई मुख्यमंत्री, कई कानून मंत्री यही वादा कर चुके हैं। निवर्तमान अध्यक्ष ने नए अध्यक्ष जैन को, जैन ने शेष को दिलाई शपथ कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला एवं सेशन जज ज्ञानप्रकाश गुप्ता ने की। विशिष्ट अतिथि शहर विधायक ताराचंद जैन, राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य जस्टिस रामचंद्र सिंह झाला और अतिरिक्त महाधिवक्ता डॉ. प्रवीण खंडेलवाल ने दीपक जलाकर समारोह शुरू किया। निवर्तमान अध्यक्ष चंद्रभान सिंह शक्तावत ने नए अध्यक्ष जितेंद्र जैन को शपथ दिलाई। फिर जैन ने उपाध्यक्ष महेंद्र मेनारिया, महासचिव लोकेश गुर्जर, सचिव आशीष कोठारी, वित्त सचिव धर्मेंद्र सोनी, पुस्तकालय सचिव विनोद औदिच्य, सहवृत सदस्य भानू भटनागर, अब्दुल हनीफ, प्रेम सिंह पंवार, कांता नागदा, अरुणपाल सिंह, दिनेशचंद्र मेघवाल और सुनील शर्मा को शपथ दिलाई। आजादी की लड़ाई में भी वकीलों की महती भूमिका विस अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था का इतिहास काफी प्राचीन है। इसमें मनुस्मृति और कौटिल्य के अर्थशास्त्र का भी सार है। देश को आजादी दिलाने में भी अधिवक्ताओं की बड़ी भूमिका रही। महात्मा गांधी, सरकार वल्लभ भाई पटेल, लाला लाजपत राय, चक्रवर्ती राजगोपालाचार्य, चितरंजन दास जैसे अनेक स्वतंत्रता सेनानी पेशे से वकील थे। भारत के संविधान बनाने में भी अधिवक्ताओं का योगदान रहा है। राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य रामचंद्र झाला ने कहा कि बार और बेंच के बीच सौहार्द बना रहना जरूरी है। शहर विधायक ताराचंद जैन ने कहा कि सरकार के पास फंड की कमी नहीं है। पार्किंग या दूसरे लंबित मामले जानकारी में लाएं, ताकि समाधान करवाया जा सके। समारोह में पूर्व विधायक धर्म नारायण जोशी, पूर्व उपमहापौर पारस सिंघवी, फील्ड क्लब उपाध्यक्ष भूपेंद्र श्रीमाली, राकेश पोरवाल, भगवान लाल वैष्णव आदि मौजूद रहे। भास्कर सवाल: आजादी से पहले हक था, वकील 1980 से आंदोलन पर हैं, हाईकोर्ट बेंच पर जवाबदेही कौन लेगा? आजादी से पहले उदयपुर में हाईकोर्ट थी। यह जयपुर चली गई। इसे वापस लाने के लिए अधिवक्ता 7 नवंबर, 1980 से आंदोलन पर हैं। तब से हर माह की 7 तारीख को अधिवक्ता न्यायिक कार्यों का बहिष्कार और कोर्ट परिसर में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन 45 साल में अब तक हाईकोर्ट बेंच नहीं मिल पाई है। हर बार कोई न कोई मंत्री आकर हाईकोर्ट बेंच दिलाने का आश्वासन देकर चले जाते हैं। उदयपुर में विधायक-सांसद चुनाव से पहले वोटों की गणित बढ़ाने के लिए अधिवक्ताओं को हाईकोर्ट बेंच दिलाने का झुनझुना पकड़ा देते है। लेकिन चुनाव निकले के बाद वापस मुड़कर भी नहीं देखते है। उदयपुर के सांसद-विधायक राज्य और केंद्र में भी मंत्री रहे हैं। फिर भी नाकाम रहे। अब विधानसभा अध्यक्ष देवनानी सीएम से मुलाकात कराने का आश्वासन दे गए हैं। सवाल जिंदा है कि मुलाकात के बाद सीएम भजनलाल शर्मा हाईकोर्ट बेंच दिला पाएंगे या नहीं?

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