छत्तरगढ़ में वन विभाग की जमीन के घोटाले उजागर करने वाले उप वन संरक्षक और क्षेत्रीय वन अधिकारी को बड़ा ईनाम मिला है। दोनों को ही उठाकर ठंडे बस्ते में लगा दिया गया है। इसके साथ ही जमीन घोटालों की जांच का काम भी एक बारगी ठप हो गया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय ने करीब एक हजार वन सेवा के अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए हैं। राज्य में 47 उप वन संरक्षकों के तबादले किए गए हैं, जिनमें पांच बीकानेर में हुए हैं। छत्तरगढ़ स्टेज प्रथम में उप वन संरक्षक वीर भद्र मिश्र को मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में लगा दिया गया है। इसी प्रकार छत्तरगढ़ स्टेज प्रथम में ही क्षेत्रीय वन अधिकारी वन बंदोबस्त डॉ. योगेंद्र सिंह राठौड़ को कोलायत में पंचायत के वन कार्यालय में लगाया गया है। आपको बता दें छत्तरगढ़ और पूगल में करीब 9 हजार बीघा सरकारी जमीन के घोटाले उजागर हुए थे। माफिया ने राजस्व अधिकारियों से मिलीभगत कर वन विभाग की जमीन को भी नहीं छोड़ा। छत्तरगढ़ डीएफओ वीर भद्र मिश्र और डॉ. योगेंद्र सिंह ने विभाग की जमीनों के रिकॉर्ड चेक किए तो पता चला कि उनकी कुछ जमीन अराजीराज कर बेचने की तैयारी थी तो कुछ जमीनें सीधे ही काश्तकारों को बेच दी गई थी। छत्तरगढ़ के चक 2 डीएमएम में 270 बीघा, चक 1 आरएसएम में 90 बीघा और 6 डीएलएम में 80 बीघा भूमि का फर्जी आवंटन हुआ था। इसी प्रकार खाजूवाला के 4 पीडब्ल्यूएम में ही 3425 बीघा भूमि वन भूमि रिकॉर्ड में अराजीराज दर्ज हो गई। इसके अलावा चक 4 पीडब्ल्यूएम में ही 865 बीघा जमीन का आवंटन कर दिया गया। इसके अलावा भी कुछ चकों में वन भूमि के फर्जी आवंटन और अराजीराज करने के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे थे। इसी बीच दोनों का तबादला कर दिया गया। दोनों अधिकारियों ने वन भूमि पर जिप्सम के अवैध खनन पर भी अंकुश लगा दिया था। जमीन घोटाला और जिप्सम खनन रोकने के कारण दोनों ही अफसर माफिया के आंखों की किरकिरी बने हुए थे। इनके तबादले के पीछे राजनीति एप्रोच बताई जा रही है। वीर भद्र मिश्र के स्थान पर माउंट आबू से सूर्य प्रताप सिंह और डॉ. योगेंद्र की जगह धौलपुर रेंज चंबल सेंचुरी से विनोद कुमार जाखड़ को लगाया गया है। दोनों ही अधिकारी नए हैं। जमीन घोटलों को समझने में ही छह महीने लग जाएंगे। 47 काश्तकारों के खिलाफ परिवाद पेश करने की तैयारी थी वन भूमि पर अवैध आवंटन निरस्त करवाने के लिए छत्तरगढ़ रेंज में 47 काश्तकारों के खिलाफ कलेक्टर के समक्ष परिवाद पेश कर मुकदमे दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। छत्तरगढ़ रेंज में 1305 बीघा का जमीन घोटला अब तक उजागर हुआ है। इसमें से खाजूवाला में पाक बॉर्डर से आठ किमी दूरी पर 865 बीघा वन भूमि आवंटन फर्जी तरीके से 40 किसानों को किया गया था। अब जांच और परिवाद पेश करने काम ही ठप हो गया है। नए अधिकारी इसे आगे बढ़ाएंगे या नहीं कहना मुश्किल है। जिले में 5 डीएफओ, 19 क्षेत्रीय वन अधिकारी बदले प्रधान मुख्य वन संरक्षक की ओर से जारी तबादला सूचियों में बीकानेर जिले में पांच डीएफओ को इधर-उधर किया गया है। वीर भद्र मिश्र को छत्तरगढ़ से मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, रमेश कुमार को मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से जोधपुर वन्य जीव, सूर्य प्रताप सिंह भाटी को माउंट आबू से छत्तरगढ़ स्टेज-1, प्रवेन्द्र सिंह राजावत को डूंगरपुर से बीकमपुर स्टेज-2, सुनील कुमार को वन्यजीव बीकानेर से हनुमानगढ़ लगाया गया है। विभाग में करीब एक हजार वन सेवा अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक के तबादले किए गए हैं। इसी प्रकार 19 क्षेत्रीय वन अधिकारियों के भी तबादले किए गए हैं। कुल 47 उप वन संरक्षक, 24 एसीएफ, 203 क्षेत्रीय वन अधिकारी ग्रेड-2, 131 ग्रेड-1, 50 वनपाल, 315 फॉरेस्ट गार्ड, 159 सहायक वनपाल के अलावा बड़ी संख्या में कर्मचारियों के तबादले हुए हैं। किसी को गृह जिले में लगाया तो किसी को वहीं रख दिया जहां पदोन्नति मिली।


