जिले में तापमान में लगातार हो रही गिरावट और हाड़ कंपाने वाली ठंड ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। तापमान करीब 10 डिग्री नीचे आ गया है। शीतलहर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने जिले के सभी चिकित्सा संस्थानों को हाई अलर्ट पर रहने और शीत लहर प्रभावितों के उपचार हेतु विशिष्ट कार्य योजना के तहत कार्य करने के निर्देश दिए हैं। ठंड के इस मौसम में छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं की देखभाल खास जरूरत होती है। अस्पतालों में विशेष प्रबंध और दवाइयों की उपलब्धता CMHO डॉ. गुर्जर ने बताया कि शीतलहर से ग्रसित रोगियों के तुरन्त उपचार के लिए सभी उप-जिला अस्पतालों, सीएचसी (CHC) और पीएचसी (PHC) प्रभारियों को पाबंद किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मियों और शहरी अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने निर्देश दिए गए है। बीडीके अस्पताल, नवलगढ़, खेतड़ी, मलसीसर और चिड़ावा सहित सभी केंद्रों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। बीडीके अस्पताल के पीएमओ डॉ. जितेंद्र भांबू ने बताया कि ठंड से बचाव के लिए समुचित प्रबंध किए हैं, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। डिप्टी CMHO डॉ. भंवर लाल सर्वा ने आमजन के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। उन्होंने बताया कि पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े पहनें और शरीर को हमेशा सूखा रखें। गीले कपड़े होने पर उन्हें तुरंत बदलें ताकि शरीर की उष्मा बनी रहे। जितना संभव हो घर के अंदर रहें और अनावश्यक यात्रा से बचें। 2. खान-पान पर दें ध्यान नियमित रूप से गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें। भोजन में गुड़, तिल, मेथी, लहसुन और खजूर जैसे गर्म प्रकृति वाले पदार्थों को शामिल करें। सावधानी: इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज CMHO डॉ. गुर्जर ने बताया कि ठंड लगने या ‘शीतदंश’ के लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। लक्षण: उंगलियों, कान की लोब या नाक की नोक का सुन्न होना, सफेद या पीला पड़ना। क्या न करें: प्रभावित हिस्से की मालिश कभी न करें, इससे ऊतकों को नुकसान हो सकता है। उपचार: प्रभावित अंगों को हल्के गुनगुने पानी में रखें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। चेतावनी: कंपकंपी को नजरअंदाज न करें, यह शरीर में गर्मी खत्म होने का पहला संकेत है। ऐसी स्थिति में तुरंत घर लौटें और खुद को गर्म करें।


