14 जनवरी को मकर संक्रांति का स्नान पर्व हैं। इस बार स्नान पर्व के लिए शिप्रा में नर्मदा का पानी लेने से पहले अफसरों को एक-दो नहीं चार चुनौतियों से जूझना पड़ेगा। हर वर्ष मकर संक्रांति पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा के रामघाट पर स्नान करने पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन एनवीडीए से पाइपलाइन के जरिए के नर्मदा का साफ शिप्रा में लेता है। पीएचई ने कलेक्टर कार्यालय को मकर संक्रांति स्नान पर्व के लिए एनवीडीए को पत्र भेजने के लिए प्रस्ताव दे दिया है। कलेक्टर कार्यालय से पत्र एनवीडीए भेजा जा रहा है, ताकि वहां से समय रहते शिप्रा के लिए पानी छोड़ा जा सके। इधर कुछ चुनौतियां सामने आई हैं, जिन्हें नर्मदा का पानी लेने से पहले अधिकारियों को समझना होगा। अन्यथा लिया जा रहा पानी दूषित हो सकता है या फिर उसके जरिए शिप्रा किनारे हो रहे विभिन्न कार्य प्रभावित-बाधित हो सकते हैं। ऐसे में जल्द ही मौके पर संयुक्त विभागों की टीम पहुंचेगी और वस्तुस्थिति को समझते हुए इस दिशा में आगे कदम बढ़ाएगी। मकर संक्रांति स्नान का धार्मिक महत्व: शिप्रा में मकर संक्रांति स्नान का विशेष महत्व है। क्योंकि यह सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है, जिसमें श्रद्धालु शिप्रा में डुबकी लगाकर, तिल-गुड़ का दान, तर्पण और सूर्य को अर्घ्य देते हैं, जिससे पाप-ताप नष्ट होते। पितरों को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता व समृद्धि आती है। चार अड़चनें व चुनौती…इनसे निपटना होगा कान्ह का गंदा पानी – कान्ह का गंदा पानी शिप्रा में लगातार मिल रहा है। नर्मदा का साफ पानी लेने से पहले इसकी रोकथाम जरूरी है। दानी गेट पर छोटी रपट का निर्माण शिप्रा पर छोटी रपट पुलिया निर्माण: यहां पानी रोकने के लिए प्लेट लगा रखी है। समझना होगा कि रुका हुआ गंदा पानी आने वाले साफ पानी को गंदा ना कर दे। या गंदे पानी को आगे बहाए तो रपट का काम तो प्रभावित नहीं होगा। पर्व स्नान के लिए नर्मदा का पानी ले रहे
मकर संक्रांति के स्नान पर्व के लिए नर्मदा का पानी लिया जा रहा है। इसके पहले कान्ह के गंदे पानी की रोकथाम सहित कुछ निर्माण कार्यों को भी मॉनिटरिंग करवा रहे हैं। – रोशन कुमार सिंह, कलेक्टर


