सतना के थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों में एचआईवी संक्रमण के मामलों के सामने आने के बाद अब जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में सुधार की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सरदार वल्लभ भाई पटेल शासकीय जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक की लंबे समय से चली आ रही कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। 29 साल बाद काउंटर पर रखा जाएगा रिकॉर्ड
करीब 29 साल बाद ब्लड बैंक को एक अस्थायी काउंसलर की नियुक्ति मिली है। अब रक्तदान करने वाले डोनरों की काउंसलिंग की जाएगी। यह जिम्मेदारी जिला एड्स नियंत्रण समिति के अंतर्गत आईसीटीसी में कार्यरत ममता सिंह को सौंपी गई है। काउंसलर का काम रक्तदान से पहले डोनरों को सही जानकारी देना और किसी भी तरह के जोखिम से बचाव करना होगा। जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल में 1996 में ब्लड बैंक की शुरुआत हुई थी और उसी समय काउंसलर का पद भी स्वीकृत किया गया था, लेकिन इतने वर्षों तक यह पद खाली ही रहा। साल 2011 में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट शुरू हुई, इसके बाद भी काउंसलर की नियुक्ति नहीं हो सकी। इस दौरान बिना काउंसलिंग के ही रक्त संग्रह और वितरण होता रहा। अब डिजिटली होगा सारा रिकॉर्ड
अब ब्लड बैंक में एक और बड़ा बदलाव किया जा रहा है। सभी रिकॉर्ड मैन्युअल रजिस्टर की जगह ऑनलाइन रखे जाएंगे। यह निर्णय करीब 10 दिन पहले ब्लड सेल की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. रूबी खान के निरीक्षण के बाद लिया गया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अब ब्लड बैंक का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन ही संधारित किया जाए। ब्लड बैंक में पहले से एक डाटा एंट्री ऑपरेटर मौजूद है और अब एक और ऑपरेटर की व्यवस्था की गई है। अब तक डोनर, ब्लड स्टॉक, इश्यू, टीटीई, कंपोनेंट और डिस्कार्ड से जुड़े सभी रिकॉर्ड रजिस्टरों में लिखे जाते थे, लेकिन अब यह काम पूरी तरह डिजिटल तरीके से किया जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में किसी भी तरह की लापरवाही पर रोक लगेगी।


