उदयपुर में श्रीमाली समाज के संस्कार भवन का लोर्कापण:5 करोड़ रूपए की लागत से 9 साल बनकर तैयार हुआ, समाज के भामाशाहों का रहा सहयोग

उदयपुर में श्रीमाली ब्राह्मण समाज के सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों के लिए निर्मित श्री संस्कार भवन का लोकार्पण रविवार को हुआ। करीब 5 करोड़ रूपए से ज्यादा की लागत से टाइगर हिल इलाके में यह भवन बनाया गया है। जहां 39 रूम, 2 सभागार, गार्डन और यज्ञशाला, भोजनशाला पार्किंग समेत भविष्य की सभी आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखा गया है। 2016 से इस भवन की नींव रखी गई थी। कार्यक्रम में समाज विभूति मुख्य अतिथि खेम प्रकाश जोशी रहे, जबकि प्रेरणास्रोत सत्यनारायण श्रीमाली और प्रेमशंकर बोहरा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। श्री संस्कार भवन सम्पत्ति व्यवस्था ट्रस्ट के अध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली ने बताया कि यह भवन समाज के प्रमुख हस्ताक्षर रहे एमडीएस यूनिवर्सिटी के कुलपति रहे स्वर्गीय प्रो. विजय श्रीमाली द्वारा देखे गए स्वप्न का साकार रूप है। उनके साथ-साथ अनेक भामाशाहों के सहयोग से यह परियोजना पूर्ण हो सकी। आगे भी अलग-अलग चरणों में इसका निर्माण करवाया जाएगा। संस्कार भवन में सम्पूर्ण द्वितीय तल का निर्माण करवाने वाले सत्यनारायण श्रीमाली ने कहा कि समाज को एक सूत्र में पिरोए रखने और समाजजनों के सामूहिक और निजी कार्यक्रमों को सम्पन्न करने के लिए यह भवन बेहद उपयोगी सिद्ध होगा। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि श्री संस्कार भवन समाज के लिए एक स्थायी धरोहर है, जो आने वाली पीढ़ियों को संस्कार, एकता और संगठन की दिशा प्रदान करेगा। कार्यक्रम में जिला न्यायाधीश महेंद्र देव, दिग्विजय श्रीमाली, दिनेश श्रीमाली, सुरेश श्रीमाली सहित प्रमुख अतिथिगण मौजूद रहे। कार्यक्रम संयोजक जयप्रकाश श्रीमाली ने जानकारी दी कि प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय तल के निर्माण में सहयोग करने वाले भामाशाहों के साथ-साथ भोजनशाला, रुक्मणी संस्कृति संकुल, कार्यालय कक्ष, मुख्य द्वार, यज्ञशाला, डोम एवं जल टंकी जैसे विकास कार्यों में योगदान देने वाले भामाशाहों का भी मंच से सम्मान किया गया। सहसंयोजक सुनीलदत्त श्रीमाली एवं सूर्यप्रकाश श्रीमाली ने बताया कि इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में श्री श्रीमाली ब्राह्मण समाज संस्था मेवाड़ के अध्यक्ष दिग्विजय श्रीमाली और पदाधिकारियों एवं सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम आयोजन में ओमप्रकाश श्रीमाली, भावप्रकाश श्रीमाली, जमनालाल श्रीमाली, गणेश श्रीमाली, नर्बदा शंकर व्यास, भूपेंद्र श्रीमाली, देवेंद्र श्रीमाली की सक्रिय भूमिका रही।

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