लोन शर्त और FD जैसा झांसा देकर फंसा रहे एजेंट:इंश्योरेंस कंपनियों के खिलाफ 1.20 लाख शिकायतें, मिस-सेलिंग का हिस्सा 22.14% हुआ

इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने अपनी एनुअल रिपोर्ट (2024-25) में बीमा क्षेत्र में पॉलिसी मिस-सेलिंग पर चिंता जताई है। रेगुलेटर ने कंपनियों को निर्देश दिया कि वे कारणों की पहचान के लिए ‘रूट कॉज एनालिसिस’ (RCA) करें। मिस-सेलिंग का मतलब ग्राहकों को बिना पूरी जानकारी दिए, नियम-शर्तों को छुपाकर या उनकी जरूरत के उलट गलत पॉलिसी बेचना है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने भी बैंकों और बीमा कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे ग्राहकों को गलत पॉलिसी न बेचे। कुल शिकायतों में से 22% मामले गलत तरीके से पॉलिसी बेचने के IRDAI की रिपोर्ट के अनुसार, लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के खिलाफ दर्ज होने वाली कुल शिकायतों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है। लोगों को फंसाने के लिए मिस-सेलिंग के 3 बड़े तरीके बीमा क्षेत्र में मिस-सेलिंग कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब यह खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। कंपनियां और एजेंट अक्सर इन 3 तरीकों से आपको झांसा देते हैं: अगर आपके साथ ‘धोखा’ हुआ है, तो ये है बचने का तरीका अगर आपको लगता है कि आपको गलत पॉलिसी बेची गई है, तो ये काम कर सकते हैं… भारत में बीमा की पहुंच अभी भी कम IRDAI की रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि भारत में इंश्योरेंस की पहुंच दुनिया के औसत 7.3% के मुकाबले मात्र 3.7% है। चिंता की बात यह है कि लाइफ इंश्योरेंस कराने वाले लोगों की संख्या पिछले साल के मुकाबले 2.8% से घटकर 2.7% रह गई है। कंपनियों को प्रभावी रणनीति बनाने की सलाह रेगुलेटर ने कंपनियों से कहा है कि वे समय-समय पर इस समस्या की समीक्षा करें। सुझाव दिया- कंपनियों को यह देखना चाहिए कि क्या वे ग्राहक की जरूरत के हिसाब से सही प्रोडक्ट दे रही हैं। इसके साथ ही डिस्ट्रीब्यूशन चैनल्स (जैसे एजेंट या बैंक) पर नियंत्रण बढ़ाने और शिकायतों के निपटारे के लिए एक ठोस प्लान विकसित करने को कहा गया है। मिस-सेलिंग की वजह से ग्राहक प्रीमियम नहीं भरते और पॉलिसी लैप्स (बंद) हो जाती है, जिससे बीमा कंपनियों और ग्राहकों दोनों का नुकसान होता है।

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