डीग में भामाशाहों और प्रतिभाओं का हुआ सम्मान:शिक्षा, संस्कार और पुस्तकों के महत्व पर दिया जोर; श्री हिंदी पुस्तकालय समिति का शताब्दी वर्ष समारोह मनाया

डीग में श्री हिंदी पुस्तकालय समिति ने अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को दानदाताओं और प्रतिभाओं के सम्मान में एक समारोह आयोजित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने मां वाणी के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ किया। बृजेश शर्मा ने मंत्रोच्चार किया, जबकि सुनील सरल ने मां वाणी की वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंजीनियर लक्ष्मण शर्मा ने अपने संबोधन में शिक्षा, संस्कार और पुस्तकों के महत्व पर जोर दिया। शर्मा ने समिति के शताब्दी वर्ष को एक गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। सिद्धपीठ पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी कौशल किशोर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय समाज को बौद्धिक रूप से समृद्ध करने का एक सशक्त माध्यम हैं और युवाओं को इनसे जुड़ना चाहिए। बॉम्बे हॉस्पिटल जयपुर के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नीरज शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। उन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए अध्ययन को आवश्यक बताया। लोहागढ़ ग्रुप ऑफ कंपनी भरतपुर के डायरेक्टर भगत सिंह दूसरे विशिष्ट अतिथि थे। उन्होंने सामाजिक संस्थाओं के सहयोग और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को समाज की मजबूती का आधार बताया। भगत सिंह ने समिति को एक लाख रुपये देने की भी घोषणा की। श्री हिंदी पुस्तकालय समिति के सभापति मानसिंह यादव ने अतिथियों का परिचय दिया और स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। समिति के प्रधानमंत्री के.के. मुदगल ने कार्यक्रम का विस्तृत विवरण दिया। कवि सुरेंद्र सार्थक ने मंच संचालन किया। सभापति यादव ने समिति के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्री हिंदी पुस्तकालय समिति डीग की स्थापना वर्ष 1927 में एक किराए के कमरे से हुई थी। यह लगभग दस वर्षों तक वहीं से संचालित हुई। वर्ष 1937 में समिति का अपना भवन बनकर तैयार हुआ, जहां यह पुस्तकालय आज भी चल रहा है।

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