अतिथि शिक्षकों ने भविष्य सुरक्षित करने की मांग की:कार्यानुभव और वरिष्ठता के आधार पर सौंपा ज्ञापन

आजाद स्कूल अतिथि शिक्षक संघ, मध्यप्रदेश ने रविवार दोपहर राज्यपाल, मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर संजय जैन को सौंपा। इसमें अतिथि शिक्षकों ने अपने कार्यानुभव और वरिष्ठता के आधार पर भविष्य सुरक्षित करने की मांग की। संघ ने बताया कि पिछले 17-18 वर्षों से अतिथि शिक्षक स्कूल शिक्षा विभाग और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के अंतर्गत शासकीय विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। बार-बार निवेदन के बावजूद उनकी स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों के लिए कैबिनेट में पारित प्रस्ताव में तीन अलग-अलग कैडर बनाए गए हैं। हालांकि, अतिथि शिक्षकों को इनमें से किसी भी कैडर में शामिल नहीं किया गया, जिससे उन्हें सेवा से बाहर होने का भय सता रहा है। ज्ञापन में संघ ने मांग की है कि अतिथि शिक्षकों का सेवाकाल 12 माह किया जाए और 62 वर्ष की आयु तक उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाए। इसके लिए कार्यानुभव और वरिष्ठता को आधार बनाया जाए। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में सेवा से हटाए गए अतिथि शिक्षकों को रिक्त पदों पर समायोजित करने की भी मांग की गई। संघ ने शिक्षक भर्ती में बोनस अंक जोड़ने, विभागीय परीक्षा आयोजित करने और कैबिनेट में पारित प्रस्ताव के अनुसार संविदा कैडर में सम्मिलित करने की भी अपील की। इसके अलावा, हरियाणा मॉडल अतिथि शिक्षक विधेयक 2019 और छत्तीसगढ़ मॉडल (12 माह, 62 वर्ष) को मध्यप्रदेश में लागू करने की मांग की गई। संघ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2018 में लिखे गए पत्र के अनुरूप अतिथि शिक्षकों को संविदा शिक्षक बनाने की भी अपील की। संघ के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि शासन स्तर पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा, जिससे अतिथि शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित हो सके। इस दौरान गणेश मिश्रा, सुनील कुमार, जिला सचिव देवेंद्र गोड़, कार्यकारिणी अध्यक्ष रामहंस रावत, भूपेंद्र रावत संकुल प्रभारी टर्राकला, भरत जाट, गणेश मीणा, जगदीश आर्य, दीनदयाल जाटव, ब्रजेन्द्र माहौर और दुलीचंद मीणा सहित कई सदस्य मौजूद रहे।

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