नीमच में रविवार को सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (CITU) और कई सामाजिक संगठनों ने अमेरिका की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। शहर के 40 चौराहे पर एकत्रित होकर कार्यकर्ताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पुतला फूंका और जमकर नारेबाजी की। यह प्रदर्शन वेनेजुएला पर कथित अमेरिकी हमले और वहां के राष्ट्रपति व उनकी पत्नी को बंधक बनाए जाने की घटना के विरोध में किया गया। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी साम्राज्यवाद को विश्व शांति के लिए खतरा बताया। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर को पैरों तले कुचला और फिर उसे आग के हवाले कर दिया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए माकपा के जिला सह सचिव निरंजन गुप्त ‘राही’ ने कहा कि वेनेजुएला पर हमला केवल एक देश की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी दादागिरी का प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका उन निर्वाचित सरकारों को निशाना बना रहा है जो अपने राष्ट्रीय हितों और प्राकृतिक संपदा की रक्षा करती हैं। तेल भंडार पर अमेरिका की नजर NAPM के कृपाल सिंह ने अमेरिका पर हमला बोलते हुए कहा कि उसकी नजर वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका इराक पर कब्जे के दौरान फैलाए गए झूठ की तरह ही वेनेजुएला के बारे में भी झूठ फैला रहा है। किशोर जेवरिया ने इस वैश्विक मामले पर भारत की केंद्र सरकार की चुप्पी को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। जनवादी लेखक संघ की अध्यक्ष प्रियंका कविश्वर ने संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि UN को तुरंत हस्तक्षेप कर वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करनी चाहिए। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान नितेश यादव, महेंद्र मेहरा, सुनील शर्मा, मुकेश नागदा, रमेश गरासिया, वसीम खान, शैलेंद्र सिंह ठाकुर, काजी नूरुल हसन और कुशाग्र सिंह सहित बड़ी संख्या में विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता और आम नागरिक मौजूद रहे।


