सपनों को सच करने का रास्ता आसान नहीं होता। यह बात फिरोजपुर रोड निवासी साइक्लिस्ट हर्षवीर सेखों की जिंदगी पूरी तरह साबित करती है। अपनी मेहनत की दम पर भारतीय ट्रैक साइक्लिंग टीम का हिस्सा हैं। एशियन गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और दर्जनों मेडल जीत चुके हैं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया। उन्होंने हाल में ही उत्तराखंड के रुद्रपुर में हुई नेशनल ट्रैक साइक्लिंग चैंपियनशिप में अलग-अलग इवेंट में दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। इसके साथ ही दो से छह दिसंबर को संभलपुर ओडिशा में हुई रोड नेशनल चैंपियनशिप में 40 किलोमीटर टाइम ट्रायल में सिल्वर मेडल जीता है। 27 वर्षीय हर्षवीर पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में मौजूदा समय में तैयारी कर रहे हैं। साथ ही वह खेल विभाग के आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्स कैटेगरी के तहत छोटे बच्चों को कोचिंग भी दे रहे हैं। भविष्य के साइक्लिस्ट तैयार कर रहे हैं। हर्षवीर के पिता बलजीत सिंह इश्योरेंस ब्रोकर और माता कुलदीप कौर बुटीक चलाती हैं। हर्षवीर जुलाई में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और अक्टूबर होने वाले एशियन गेम्स की तैयारी कर रहे हैं। पढ़िए उन्हीं से उनके संघर्ष की कहानी। दोस्तों की सलाह ने दी नई राह… मैंने साल 2004 में छह साल की उम्र से स्केटिंग शुरू की थी। सुबह-शाम कड़े अभ्यास की बदौलत मैंने जिला और राज्य स्तर पर कई पदक जीते। मेरी मेहनत तब रंग लाई जब 2014 की एशियन चैंपियनशिप (जूनियर) में मैंने सिल्वर मेडल जीता और 2018 के एशियन गेम्स में हिस्सा लिया। हालांकि, रोलर स्केटिंग में मुझे अभ्यास और यात्रा का खर्च खुद उठाना पड़ता था, जिससे मैंने महसूस किया कि यहां अवसर सीमित हैं। दोस्तों और सीनियरों की सलाह पर मैंने साइक्लिंग की ओर रुख किया। कोच गुरवाज सिंह की साइकिल लेकर मैंने अभ्यास शुरू किया। जल्द ही ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी गेम्स में ब्रॉन्ज और 2019 की नेशनल प्रतियोगिता में पदक जीतकर मुझे नई दिशा मिली। इसी प्रदर्शन के आधार पर मेरा चयन भारतीय साइक्लिंग टीम में हुआ और मैंने 2023 एशियन गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व किया। -जैसा साइक्लिस्ट हर्षवीर सेखों ने बताया


