जरूरी जानकारी न देने पर अस्पताल के चार डॉक्टर निदेशकों पर पर्चा

फिरोजपुर रोड स्थित ओरिसन सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में 72 वर्षीय महिला जसबीर कौर का शव बदलने के मामले में पुलिस ने 13 दिन की जांच के बाद अस्पताल के चार डायरेक्टरों को नामजद किया है। आरोपियों में डॉ. निर्मलजीत सिंह मल्ली, डॉ. सुनील मित्तल, डॉ. राजीव ग्रोवर और डॉ. मनीषा मित्तल शामिल हैं। पुलिस ने एफआईआर में स्पष्ट किया है कि यह घटना केवल किसी कर्मचारी की गलती नहीं, बल्कि संस्थान की गंभीर मेडिकल और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। जांच के अनुसार, शव को संभालने और रिकॉर्ड बनाए रखने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की होती है। पुलिस का मानना है कि शव बदलना और जानकारी छिपाना जैसे कार्य प्रबंधन की मंजूरी या जानबूझकर की गई लापरवाही के बिना संभव नहीं हैं। इसके अलावा, पीड़ित परिवार द्वारा बार-बार मांगने के बावजूद अस्पताल ने सीसीटीवी फुटेज देने से इनकार किया, जिसे सबूत मिटाने की कोशिश माना जा रहा है।घटना का विवरण यह है कि मोगा निवासी जसबीर कौर की मौत के बाद शव मोर्चरी में रखवाया गया था। जब उनके बेटे कनाडा से लौटे और शव लेने पहुंचे, तो वहां किसी अन्य महिला का शव मिला। इस पर परिजनों ने अस्पताल में जोरदार हंगामा और धरना दिया, जिसके बाद थाना सराभा नगर की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्यवाही शुरू की। तीन साल की सजा हो सकती है महिला शव बदलने के मामले में वर्तमान में बीएनएस की धारा 305, 314 और 316 दर्ज हैं, लेकिन जांच बढ़ने पर नई धाराएं जुड़ना तय है। शव से छेड़छाड़ साबित होने पर धारा 303 और रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा मिलने पर धारा 336 (जालसाजी) जोड़ी जा सकती है। जानकारी छिपाने पर धारा 238 और सीसीटीवी फुटेज न देने या जांच में बाधा डालने पर धारा 221 लागू होगी। यदि अस्पताल प्रबंधन या डॉक्टरों की मिलीभगत पाई गई, तो धारा 61 (अपराधिक साजिश) के तहत कार्रवाई होगी, जिसमें साल तक की सजा का प्रावधान है। रखवाया गया था। जब उनके बेटे कनाडा से लौटे और शव लेने पहुंचे, तो वहां किसी अन्य महिला का शव मिला। इस पर परिजनों ने अस्पताल में जोरदार हंगामा और धरना दिया, जिसके बाद थाना सराभा नगर की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्यवाही शुरू की। संजीव मल्होत्रा, सीनियर वकील

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