तलवारें लहराते महाकुंभ पहुंचे 5 हजार संत, विदेशी भी आए:चांदी के सिंहासन पर सवार हुए; शंख बजा कर करतब दिखाए

महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू हो रहा है। इसके एक महीने पहले ही देशभर से साधु-संत प्रयागराज पहुंचने लगे हैं। आज श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा का छावनी प्रवेश यानी पेशवाई और किन्नर अखाड़े की देवत्व यात्रा निकाली गई। संतों ने हर-हर महादेव के जयघोष के साथ यात्रा शुरू की। इसमें विदेश के साथ भारत के कई राज्यों से अखाड़ों के करीब 5 हजार पदाधिकारी और संत शामिल हुए। ढोल नगाड़ों के साथ साधु-संत महाकुंभनगर में प्रवेश किया। यमुना तट पर स्थित मौजगिरी आश्रम से यह यात्रा शुरू हुई। इसमें चांदी के सिंहासन पर महामंडलेश्वर छत्र और चंवर के साथ चले। संत शंखनाद कर करतब दिखाते हुए चले। जिधर से यात्रा गुजरी, लोग साधु-संतों पर फूल बरसाकर उनका आशीर्वाद लेते दिखे। सबसे आगे जूना अखाड़े के देवता दत्तात्रेय भगवान, इसके बाद धर्म ध्वजा और आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद महाराज चल रहे थे। इसके पीछे किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरी समेत सैकड़ों संत रहे।

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