भास्कर संवाददाता | भैरूंदा चमेटी और छिदगांव काछी गांवों के बीच कोलार नदी पर बना पुल इन दिनों क्षेत्रवासियों के लिए गंभीर खतरा बन गया है। पुल की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उस पर से गुजरना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब दो वर्ष पूर्व पुल की मरम्मत के लिए लगभग 22 लाख रुपए की राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन मरम्मत केवल कागजों तक ही सीमित रह गई। वर्तमान स्थिति यह है कि पुल से लोहे के सरिए और तार बाहर निकल आए हैं। जगह-जगह से कंक्रीट उखड़ चुका है और ढांचा कमजोर हो गया है। इस पुल से रोजाना छात्र, किसान, मजदूर और ग्रामीण आवाजाही करते हैं। विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शाम और रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने से कई बार वाहन चालक खुले तारों में उलझकर गिर चुके हैं। न संकेतक न बैरिकेड लगाए: ग्रामीणों का कहना है कि छोटे हादसे आम हो चुके हैं। न तो पुल की मरम्मत कराई जा रही है और न ही सुरक्षा के लिए चेतावनी संकेतक या बैरिकेड लगाए गए हैं। ग्रामीण भगवान सिंह कुशवाहा ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत 181 हेल्पलाइन पर भी की है। उनका आरोप है कि मरम्मत के लिए स्वीकृत 22 लाख रुपए का सही उपयोग नहीं हुआ। निरीक्षण कराया जाएगा ^पुल की मरम्मत करीब तीन साल पहले कराई गई थी, लेकिन वर्तमान में स्थिति फिर खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि इंजीनियर को मौके पर भेजकर निरीक्षण कराया जाएगा और आवश्यक कार्य शुरू किया जाएगा। वहीं अस्थायी पुल को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था रेत ठेकेदार द्वारा अपने वाहनों की आवाजाही के लिए की गई है। – वर्तिका तोमर, एसडीओ, ब्रिज निगम


