हीमोफीलिया मरीजों के लिए बड़ी राहत:अब रोज नहीं, 7 दिन में लगेगा इंजेक्शन, सरकार के हर साल 25 करोड़ रुपए तक बचेंगे

प्रदेश के हीमोफीलिया मरीजों के लिए राहत की खबर है। अब उन्हें रोज या बार-बार महंगे इंजेक्शन नहीं लगवाने पड़ेंगे। चिकित्सा विशेषज्ञों की रिसर्च में सामने आया है कि नॉन-फैक्टर दवा एमिसिजुमेब न केवल पहले की तुलना में कहीं ज्यादा असरदार है। फिलहाल हीमोफीलिया मरीजों को दिए जाने वाले फैक्टर-बेस (बायपासिंग एजेंट) इंजेक्शन अत्यधिक महंगे हैं। 40 किलो वजन के मरीज पर यदि यह इंजेक्शन महीने में एक बार भी लगाया जाए, तो एक साल में इलाज का खर्च 1 करोड़ 37 लाख से अधिक हो जाता है। वहीं एमिसिजुमेब से एक साल का इलाज मात्र 12.72 लाख हजार रुपए में संभव है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस दवा को सरकारी योजना में शामिल किया जाता है तो प्रदेश सरकार को हर साल कम से कम 25 करोड़ रुपए की बचत हो सकती है। एनएचएम को भेजे गए प्रस्ताव जेके लोन अस्पताल की ओर से एनएचएम को इस दवा को आवश्यक सूची में शामिल करने के लिए पत्र भेजा जा चुका है। महाराष्ट्र, असम, तेलंगाना, त्रिपुरा, बिहार जैसे राज्यों में यह दवा पहले से ही फ्री स्कीम में दी जा रही है। एसएमएस-जेके लोन में मरीजों पर उपयोग एसएमएस मेडिकल कॉलेज और जेके लोन अस्पताल के डॉक्टरों ने चुनिंदा मरीजों पर एमिसिजुमेब का उपयोग किया। बेहतर और स्थायी परिणाम मिलने के बाद इस रिसर्च को इंटरनेशनल जर्नल में भेजा गया, जहां इसे पब्लिश किया गया। इसके बाद प्रदेश भर के डॉक्टर लगातार इस दवा को शामिल करने के लिए सरकार को पत्र लिख रहे हैं।

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