दुर्ग में शिवनाथ नदी पर कब्जा हो गया है। ईंट-भट्टे के ठेकेदार ने नदी पर अपना एनीकट (मिट्टी का रास्ता) बना लिया है। इससे नदी के पानी का बहाव भी कुछ हद तक थम गया है। ईंट बनाने के लिए नदी के दोनों ओर की मिट्टी भी काटी जा रही है। भट्टे का मलबा भी नदी में ही फेंका जा रहा है, जिससे नदी प्रदूषित हो रही है। पथरिया और रवेलीडीह पंचायत के बीच से शिवनाथ नदी गुजरती है। पुल बारिश के दौरान जरूर बह जाता है, लेकिन ठेकेदार फिर उसे तैयार करवा देता है। बाकी 8 महीने इसी रास्ते का उपयोग करके ईंट-भट्टे तक एक किनारे से दूसरे किनारे तक मिट्टी पहुंचाई जाती है। यह अवैध निर्माण नहीं होने उसे इस काम के लिए 10 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती। एनीकट बनाने की अनुमति सिंचाई विभाग से नहीं ली गई है। नदी किनारे बसे गावों के सरपंचों से भी कोई अनुमति नहीं ली गई है। मामला उजागर होने पर सब दे रहे अपनी-अपनी सफाई पंचायत से अनुमति नहीं ली
ईंट-भट्ठे वाले ने बांध बनाया है। पंचायत से किसी भी तरह की कोई अनुमति नहीं ली है। बीते कई वर्षों से अस्थाई बांध बनाकर ईंट भट्ठे का काम कर रहा है। इसकी एक बार शिकायत की थी। इसके बाद तत्कालीन सचिव नरेश साहू पर कार्रवाई भी हुई थी। बांध बनने से ठेकेदार को फायदा है। आने-जाने के समय और पैसों की बचत कर रहा है।
– मीत कुमार निषाद, पथरिया पंचायत सरपंच पंचायत को किराया भी नहीं दिया
ईंट-भट्टे वाले ने अपने फायदे के लिए मिट्टी का बांध बना लिया है। हर साल इसी तरह बारिश को छोड़कर बांध बना लेता है। इससे मिट्टी और ईंट परिवहन करने में उसे सहूलियत मिलती है। ठेकेदार ने ईंट का स्टॉक रखने के लिए जरूर एक पंचायत की जमीन किराए पर ली है। लेकिन किराए के 55 हजार रुपए अभी तक पंचायत में जमा नहीं करवाया है।
– माधोलाल देवांगन, रेवलीडीह पंचायत सरपंच नोटिस दिया था, उसने केस लगा दिया
बिना अनुमति के अस्थाई बांध बना हुआ है। पिछले वर्ष नोटिस दिया था, जिसके बाद उसने बांध पर मालिकाना हक के लिए कोर्ट में केस लगा दिया। इस वर्ष भी मौखिक तौर पर निर्माण कार्य करने से मना किया था। अतिक्रमण को लेकर थाने में भी शिकायत की है। बीते 30 वर्षों से नदी पर बांध बनाकर उपयोग कर रहा है। मिट्टी के बांध पर कभी भी दुर्घटना हो सकती है। कोर्ट में हमने अपना पक्ष रखा है।
– कुलेश्वर जोशी, एसडीओ सिंचाई विभाग दुर्ग बांध बना सकते हैं, लोग भी आते-जाते हैं
कुछ लोगों ने आपत्ति लगाई थी। इसके बाद कोर्ट में केस लगाया है। नदी में बांध बनाया जा सकता है। पानी का बहाव न रुके इसके लिए बांध में 10 स्थानों पर पाइप लगाया है। रास्ते का उपयोग सभी करते हैं। किसान लोग धान की गाड़ी लेकर भी इसी बांध से आते-जाते हैं। नियम के तहत नदी पर बनाया है बांध। इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इस रास्ते से आम लोग भी आना-जाना कर रहे है।
– नीलकंठ पांडे, ठेकेदार, ईंट भट्ठा रवेलीडीह


