बदलाव से मुनाफा 70 प्रतिशत बढ़ा‎:राजस्थान में सीखी इजरायली तकनीक से खीरा की खेती

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले‎के ग्राम गातापार खुर्द में 40 साल से धान‎की परंपरागत खेती करने के बाद एक‎बदलाव ने किसान की आमदनी बढ़ा दी।‎12वीं तक पढ़े 55 वर्षीय किसान सुरेश‎सिन्हा ने धान की बजाय 6 एकड़ में खीरा‎की खेती शुरू की। ‎3 महीने की इस‎फसल ने उन्हें धान के मुकाबले कई गुना‎मुनाफा दिया। इसके लिए उन्होंने तकनीक‎का भी सहारा लिया। उन्होंने पॉलीहाउस,‎ ड्रिप सिंचाई के साथ मल्चिंग का‎इस्तेमाल किया। वे अब भी नए-नए‎तकनीक का लगातार सहारा ले रहे हैं।‎ किसान सुरेश ने 6 एकड़ में जो खीरा ‎‎लगाया, वह 20 रुपए किलो की कीमत तक ‎‎बिक रहा है। कुछ नया प्रयोग करने के लिए ‎‎किसान राजस्थान पहुंचे। उन्होंने वहां गुड़ा ‎‎कुमावतान में खीरे की खेती करने वाले‎किसान खेमाराम चौधरी से इजरायली‎तकनीक से हो रही खेती सीखी और इसे‎अपना लिया। उन्हें यह जानकारी मिली कि ‎‎अन्य फसल के मुकाबले खीरा लगाने में‎पानी, परिश्रम, लागत, बीमारी, कीट प्रकोप ‎‎कम होता है और मुनाफा ज्यादा है।‎ उन्होंने सबसे पहले मिट्‌टी परीक्षण‎कराया। कृषि वैज्ञानिकों की मदद से मिट्‌टी‎को खीरे की खेती के लिए उपयुक्त बनाने,‎हानिकारक बैक्टिरिया खत्म करने जरूरी‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎खाद और दवा डाली। यहां जलवायु और‎मिट्‌टी खीरे की पैदावार करने अनुकूल है।‎पॉली हाउस में खीरे के बीज लगाने के 32‎दिन में आमदनी शुरू होती है।‎ जिस तकनीक का सुरेश ने इस्तेमाल‎किया, उसके बारे में बताते हुए वे कहते हैं‎कि इजरायली तकनीक से खीरे की खेती‎का मतलब है पॉलीहाउस या नेट हाउस में‎आधुनिक तरीकों जैसे ड्रिप सिंचाई,‎मल्चिंग और नियंत्रित वातावरण‎(तापमान-हवा) का इस्तेमाल करके उच्च‎गुणवत्ता और ज्यादा पैदावार लेना, जिसमें‎बांस या तारों का सहारा देकर खीरे की‎बेलों को ऊपर चढ़ाया जाता है, जिससे‎प्रति एकड़ 30-40 टन तक उत्पादन‎संभव है। यह फसल साल भर उगाई जा‎सकती है, जिससे किसानों को काफी‎मुनाफा होता है। सुरेश बताते हैं कि प्रति‎एकड़ में खीरे की फसल से 1 लाख रुपए‎तक आय होती है, तो इसमें करीब 30‎प्रतिशत यानी 30 हजार रुपए ही लागत‎लगती है। अन्य फसलों में यही लागत 50‎हजार से ज्यादा आती है। खीरा 3 माह की‎फसल है। लागत कम होने से फसल‎खराब होने पर दोबारा बोनी की जा सकती‎है। बाजार की समस्या नहीं है, प्रदेश और‎देशभर में इसकी मांग है।‎ सुरेश बताते हैं कि यही बात उन्होंने‎गहराई से समझी। धान के बदले टमाटर‎और खीरा लगाया, जिससे उन्हें ढाई‎लाख का फायदा हुआ। उनके खीरे की‎सप्लाई उत्तर प्रदेश, कोलकाता और‎ओडिशा से बिहार, झारखंड तक है।‎साल 2024 में जुलाई से मार्च के बीच‎7 एकड़ में टमाटर की बंपर पैदावार‎होने पर 3 लाख का फायदा हुआ था।‎ इस वर्ष भी खीरा-टमाटर की फसल‎लेंगे। पॉली हाऊस में शिमला मिर्च की‎फसल ली थी, जिससे साढ़े 3 लाख का‎मुनाफा हुआ। उन्होंने 34 लाख से पॉली‎हाऊस तैयार किया। इसमें इस वर्ष‎सिजेन्टा कम्पल की मायला वैरायटी की‎टमाटर की फसल लगाएंगे। उनकी कुल‎15 एकड़ भूमि है। उन्होंने दवा छिड़काव‎करने स्ट्रिप मशीन लगा रखी है।‎

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