इंदौर में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत के बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत घरों तक जाने वाले पानी के कनेक्शनों में लीक या टूट-फूट की पहचान के लिए सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्जीबीशन सिस्टम ( स्काडा) सिस्टम का दायरा बढ़ाया जाएगा। आयुक्त नगरीय प्रशासन संकेत भोंडवे ने कहा कि अभी रैंडम सेंपलिंग, लीकेज में सुधार जैसे काम प्राथमिकता से कर रहे हैं। इसके बाद आगे दीर्घकालिक योजना पर भी काम होगा। बिना सप्लाई रोके सेंसर वाले टूल ढूंढेंगे लीकेज लॉन्ग टर्म प्लान में टेक्नोलॉजी की मदद से लीकेज रोकने की योजना है। सेंसर लगे हुए उपकरणों से पाइप लाइन में लीक ढूंढ़े जाएंगे। लाइन 150 एमएम से बड़ी तो बिना पानी की सप्लाई रोके सेंसर वाला उपकरण लाइन में भेजा जाएगा। लीक या कोई अवरोध मिलने पर ऑपरेटर इसे तुरंत रोक देगा। हैंड हेल्ड डिवाइस से लैस ऑपरेटर जमीन के नीचे वो लोकेशन ट्रेस कर लेगा। जीपीएस, एक्सेलेरोमीटर व जाइरोस्कोप से लैस फ्री स्विम बॉल ग्राउंड माइक्रोफोन जैसे यंत्र भी उपयोग होंगे। बढ़ेगा दायरा… भोपाल में बनेगा सेंट्रल कंट्रोल रूम वर्तमान में स्काडा भोपाल में करवा-कलियासोत और नर्मदा सप्लाई में वाटर फ्लो, प्रेशर आदि दिखाता है। इंदौर में भी नर्मदा सप्लाई के अलावा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और ओवरहेड टैंक आदि की ऑनलाइन निगरानी करता है। जबलपुर, ग्वालियर में कुछ जगहों के अलावा सिंहस्थ के प्रोजेक्ट में उपयोग हो रहा है। अभी निकाय मॉनिटरिंग करते हैं। अब प्लान है कि अगले 6 महीने में राजधानी में इसका सेंट्रल कंट्रोल रूम बने। इसके लिए टेंडर से काम होगा। अभी टंकियों तक निगरानी हो पाती है, बाकी के लिए मैदानी अमले पर निर्भर हैं। क्या है स्काडा ?: शहरी निकायों के प्रबंधन में उपयोग किया जाने वाला स्काडा एक सेंसर-आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग और कंट्रोल सिस्टम है, जो नगर निगम/नगर पालिकाओं महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा सेवाओं को स्मार्ट, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए लागू किया जाता है। वर्तमान में मप्र में इसे जलापूर्ति में पानी की सप्लाई की ऑनलाइन निगरानी में उपयोग किया जाता है।


