हिमाचल में MIS योजना में बड़े घोटाले की आशंका:रिकॉर्ड प्रीक्योरमेंट पर सवाल, HPMC ने बिठाई जांच, फर्जी बिलिंग जांचने को दस्तावेजों का सत्यापन

हिमाचल सरकार की मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) में कथित फर्जीवाड़े की आशंका हैं। यह गड़बड़ी सरकारी उपक्रम बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (HPMC) द्वारा MIS के तहत सेब की खरीद को रखे गए प्रिक्योरमेंट असिस्टेंट के लेवल पर की गई है। रोहडू के चिड़गांव के खरीद केंद्र में गड़बड़ी सामने के बाद HPMC द्वारा FIR करवाई जा चुकी है। कुछ अन्य खरीद केंद्रों में भी HPMC को गड़बड़ी की आशंका है। इसलिए, गड़बड़ी से पर्दा हटाने के लिए HPMC ने दो कदम उठाए है। पहला कदम- SDM-तहसीलदार की अध्यक्षता में कमेटियां गठित की गई है। अब इनकी रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। इन कमेटियों को यह रिपोर्ट देने को कहा गया कि संबंधित क्षेत्र के खरीद केंद्र में कितनी बोरियां सेब की पहुंची थी, इनमें से कितनी परवाणू के लिए ट्रांसपोर्ट की गई। कितनी बोरियां नष्ट की और कितनी बोरियों के बिल पेमेंट के लिए HPMC के सामने प्रोड्यूस किए गए। दूसरा कदम- MIS की पेमेंट के लिए HPMC ने बागवानों को नया फरमान जारी किया है। HPMC ने बागवानों को सेब की पेमेंट के लिए आधार कार्ड, उद्यान कार्ड और जमीन के दस्तावेज अनिवार्य किए है। इससे, बागवान भड़क उठे हैं, क्योंकि जमीन की सारी जानकारी बागवानों के उद्यान कार्ड में मौजूद है। फिर भी जमीन के सारे कागज, आधार कार्ड और MIS के तहत HPMC को सेब का बिल देने को बोला गया है। दस्तावेज जांचकर फर्जीवाड़ा सामने लाएगी HPMC सूत्र बताते है कि बागवानों के दस्तावेज जांचकर यह देखा जाएगा कि कहीं प्रिक्योरमेंट असिस्टेंट ने फर्जी बिल तो नहीं दिए। इनकी कुल जमीन और प्रोडक्शन को मैच किया जाएगा। उम्मीद यह भी जताई जा रही है कि यदि किसी बागवान को फर्जी बिल दिए गए है तो वह पेमेंट के लिए क्लेम नहीं करेंगे। उदाहरण के लिए यदि किसी के पास 2 बीघा जमीन और उसके 100 बोरी से ज्यादा सेब MIS में दर्शाया गया है तो उसमें गड़बड़ी की काफी संभावनाएं है। 98 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा सेब खरीदा HPMC ने इससे पहले, 2023 में रिकॉर्ड लगभग 80 हजार मीट्रिक टन सेब MIS के तहत खरीदा गया था। मगर इस बार 2023 से भी ज्यादा सेब खरीदा गया है। सेब की फसल इस बार भी 2023 के लगभग बराबर ही है। बावजूद इसके 98,500 मीट्रिक टन सेब की खरीद कई सवाल खड़े कर रही है। हालांकि, HPMC का तर्क है कि इस बार आपदा के कारण सड़कें बंद हो गई थी। इस वजह से बागवानों का सेब घरों पर ही खराब हो गया और बागवानों ने HPMC को दिया। मगर यह तर्क गले नहीं उतर रहा, क्योंकि 2023 में इससे भी ज्यादा आपदा थी। इस वजह से MIS में घोटाले की शंका है। HPMC अधिकारियों की माने तो इस बार लगभग 115 करोड़ रुपए का सेब खरीदा गया है। मानसून में बंद हो गई थी सड़कें दरअसल, इस बार मानसून सीजन के दौरान प्रदेश के कई इलाकों में लंबे समय तक सड़कें बंद रहीं। इसकी आड़ में कई खरीद केंद्रों पर अनियमितताएं की गईं। सूत्रों का कहना है कि वास्तव में जितना सेब खरीदा गया, बिल उससे ज्यादा के प्रोड्यूस किए गए, जिससे घोटाले की आशंका गहराती जा रही है। सूत्र बताते हैं कि कुछ क्षेत्रों में वास्तविक उत्पादन से कहीं अधिक सेब की एंट्री दिखाई गई, जबकि कई जगहों पर सड़कें बंद होने के कारण परिवहन ही संभव नहीं था। दस्तावेज मांगने पर भड़के किसान मामला सामने आने के बाद अब HPMC ने सेब बेचने वाले बागवानों से दस्तावेजों की क्रॉस चेकिंग शुरू कर दी है। इसके तहत किसानों से जमीन के कागजात, उत्पादन से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड मांगे जा रहे हैं। इससे बागवानों में भारी रोष है। बागवानों का कहना है कि वे पहले ही उद्यान विभाग द्वारा जारी उद्यान कार्ड बनवा चुके हैं, जिनमें उनकी जमीन, बागवानी क्षेत्र और फसल से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज है। ऐसे में बार-बार दस्तावेज मांगना न केवल अनावश्यक है, बल्कि यह किसानों को परेशान करने जैसा है। बागवानों का आरोप है कि प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए अब किसानों पर शक कर रहा है। करीब 40 हजार बागवानों ने दी फसल HPMC के अनुसार, इस वर्ष MIS योजना के तहत लगभग 40 हजार बागवानों ने HPMC को सेब उपलब्ध करवाया। इतनी बड़ी संख्या में किसानों की भागीदारी के बावजूद रिकॉर्ड खरीद को लेकर सवाल उठना अपने आप में गंभीर विषय है। FIR से बढ़ी हलचल मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चिड़गांव क्षेत्र में एक प्रोक्योरमेंट असिस्टेंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। यह एफआईआर सेब खरीद में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर दर्ज की गई है। इसके बाद से पूरे मामले की जांच की मांग तेज हो गई है। विपक्षी दल भी सरकार से जवाब मांग रहे हैं और इसे किसानों के नाम पर बड़े घोटाले का मामला बता रहे हैं। क्या है MIS योजना? मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) हिमाचल प्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण स्कीम है। इसके तहत सरकार हर साल बागवानों से निम्न गुणवत्ता (लो ग्रेड) के सेब खरीदती है, ताकि किसानों को फसल का न्यूनतम समर्थन मिल सके और सेब सड़कों पर फेंकने की नौबत न आए। यह योजना खास तौर पर उन बागवानों के लिए सहारा मानी जाती है, जिनकी फसल बाजार मानकों पर खरी नहीं उतरती। मंत्री बोले- पारदर्शिता को जांचे जा रहे दस्तावेज बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा- पारदर्शिता के लिए जमीन के दस्तावेज लाने को कहा गया है। हालांकि, उद्यान कार्ड पहले से बने है। उसे क्रॉस चेक किया जा रहा है। उन्होंने कहा- इस बार मौसम की मार पड़ी है। एक-दो जगह गड़बड़ी आई है, हमने उस पर कार्रवाई की है, पब्लिक का पैसा ऐसे नहीं उड़ाया जाएगा, इसलिए जांच की जा रही है।

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