शिक्षा एवं पंचायती राज्य मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि पिछले साल की अपेक्षा अबकी बार हमारी बोर्ड की परीक्षाएं जल्दी होगी। ताकि 1 अप्रैल से हमारा शैक्षिक सत्र प्रारंभ कर सके। क्योंकि राजस्थान सरकार ने निर्णय लिया है कि हमारा शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से प्रारंभ हो। एक ही साल में बोर्ड की परीक्षाओं को दो बार करवाएंगे। उसका कारण है कि कई बार छात्र बीमार होने के कारण एग्जाम अच्छा नहीं दे पाता तो उसके कम नंबर आते है पर वो प्रतिभावान है इसलिए एक अवसर और देने के लिए 2 महीने बाद फिर से एग्जाम करवाएंगे। कोई छात्र पहली परीक्षा में फेल हो जाता है या कम नंबर आते हैं तो दोबारा एग्जाम दे सकता है। उसे परीक्षा में पास होने के बाद उसको पास होने का प्रमाण पत्र दे देंगे। उन्होंने कहा कि हमने पिछली बार गणित विषय में रिचेकिंग करवाई थी। रिचेकिंग तो हमेशा होती थी रिचेकिंग में केवल रिटोटलिंग होती थी। अब हमने रिचेकिंग में यह कर दिया कि प्रश्न को दोबारा पढ़ा जाएगा। यदि एग्जामिनर ने कम नंबर दिए हैं ऐसा लगता है कि ज्यादा नंबर आने चाहिए तो नम्बर बढ़ाए जा सकते हैं ऐसा लगता है कि कम नंबर आने चाहिए तो घटाए जा सकते हैं। हम रिचेकिंग को रिटोटलिंग नहीं मानेंगे। हम दोबारा मूल्यांकन मानेंगे। दोबारा मूल्यांकन के बाद उसकी टोटलिंग करके परीक्षा परिणाम में जोड़ेंगे। पिछले वर्ष हमने गणित का किया था। अब तीन विषय और ले रहे हैं। अगले साल से हम सारे विषय लेंगे ताकि पारदर्शिता बनी रहे और बच्चों को बोर्ड पर पूरा विश्वास हो। बच्चों को लगे कि हमारे साथ न्याय हुआ है। मंत्री दिलावर ने कहा कि विद्यार्थियों को प्रार्थना सभा के समय न्यूज़ पेपर पढ़ने का अभ्यास डालेंगे। यानी उनको न्यूज पेपर पढ़ाएंगे ताकि उनका जनरल नॉलेज भी बड़े। और उनके रेगुलर पढ़ने का अभ्यास भी बने। अखबार में कई बार कठिन शब्द होता है, उन्हें भी पढ़ना सीखे। जिससे विद्यार्थियों का सामान्य ज्ञान बढ़ेगा अखबार में धार्मिक, आध्यात्मिक, खेती, नए शोध सहित सभी प्रकार की जानकारी होती है। सब के बारे में हमारे विद्यार्थी को जानकारी हो। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार के स्टेट ओपन स्कूल के माध्यम से बच्चे घर बैठकर पढ़ते हैं। फिर परीक्षा देते हैं। पहले 6 महीने, साल भर में एग्जाम होते थे। अब हमने किया है कि विद्यार्थी अपने डिमांड पर एग्जाम दे सकेगा। हम तिथि तय करके उस महीने में एग्जाम दिलवा देंगे। कम नामांकन वाले स्कूलों को मर्ज करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई भी समझदार होगा तो वह यही काम करेगा। जिन विद्यालय में बच्चे नहीं है, शून्य बच्चे हैं उनका क्या इलाज है? टीचर बैठा रखें तो क्या मतलब? ऐसे स्कूलों को नजदीक के स्कूल में मर्ज करेंगे तो उनकी देखभाल हो जाएगी। कुछ विद्यालय ऐसे हैं जिनमें दो-पांच बच्चे हैं ऐसे स्कूल मर्ज करना अति आवश्यक है। ताकि उन स्कूलों के टीचर का सदुपयोग कर सके।


