जालोर में पंचों ने 15 गांव की बहू-बेटियों के स्मार्टफोन यूज को लेकर बैन लगाया था। इस मामले में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कलेक्टर प्रदीप गावंडे के नाम नोटिस जारी किया हैं। इसमें 14 दिन के भीतर जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। नोटिस में कहा गया है कि ये प्रतिबंध केवल महिलाओं पर है, ऐसे में यह लिंग आधारित भेदभाव को दर्शाता है। पंचायत या सामाजिक समूहों को महिलाओं के संचार या तकनीक के उपयोग को नियंत्रित करने का कोई अधिकार नहीं है। 2 सप्ताह में मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करें। 21 दिसंबर को आया था आदेश 21 दिसंबर रविवार को जालोर जिले के चौधरी समाज सुंधामाता पट्टी की गाजीपुर गांव में बैठक हुई थी। 14 पट्टी के अध्यक्ष सुजनाराम चौधरी की अध्यक्षता में ये निर्णय लिया था। इसमें 15 गांव की बहू-बेटियों को 26 जनवरी से कैमरे वाला फोन यूज करने पर बैन लगा दिया था। इतना ही नहीं सार्वजनिक समारोह से लेकर पड़ोसी के घर पर भी फोन ले जाने पर पाबंदी लगा दी थी। उन्हें सिर्फ स्मार्ट फोन की जगह की-पैड फोन उपयोग में लेने का फरमान सुनाया था। विरोध के बाद वापस भी ले लिया था फैसला इसके बाद से पंचायत के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया था। विरोध होने पर समाज अध्यक्ष सुजनाराम चौधरी ने सफाई देते हुए कहा कि ये फैसला इसलिए लिया गया है कि महिलाओं के पास मोबाइल होने से बच्चे इसका उपयोग करते हैं। इससे आंखें खराब होने का डर रहता है। इसे विरोध के बाद वापस भी ले लिया था। NGO ने लिखा था लेटर पश्चिम बंगाल नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एनजीओ) मनीष जैन ने 2 जनवरी को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को इस मामले एक पत्र लिखा था। इस पर मानवाधिकार आयोग संज्ञान लिया है। जालोर कलेक्टर को एक नोटिस जारी करते हुए कहा है कि राजस्थान के जालोर जिले में महिलाओं को सार्वजनिक कार्यक्रमों, पड़ोसियों के घरों या सामाजिक आयोजनों में केवल साधारण कीपैड मोबाइल फोन रखने के निर्देश दिए गए हैं। यह प्रतिबंध केवल महिलाओं पर लागू किया गया है, जो लिंग आधारित भेदभाव को दर्शाता है। लेटर में लिखा- सामाजिक समूहों को ये अधिकार नहीं इसके अलावा पंचायतों या सामाजिक समूहों को महिलाओं के संचार या तकनीक के उपयोग को नियंत्रित करने का कोई अधिकार नहीं है। इस प्रकार के कदम आगे चलकर लड़कियों की शिक्षा या आवाजाही की स्वतंत्रता को भी सीमित कर सकते हैं। शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया पीड़ितों के मानवाधिकारों के उल्लंघन प्रतीत होते हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सदस्य प्रियंक कानूनगो ने संज्ञान लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट, जालोर को नोटिस जारी किया है। इसमें कहा- शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाए और दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई विवरण रिपोर्ट आयोग के अवलोकन लिए प्रस्तुत की जाए। साथ ही निर्देश दिए है कि इस पत्र की प्राप्ति की तिथि से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई विवरण रिपोर्ट आयोग को भेजी जाए। यह खबर भी पढ़े… राजस्थान में पंचों का मनमाना फैसला, महिलाएं स्मार्टफोन नहीं चलाएंगी:पढ़ने वाली बच्चियां भी समारोह और घर से बाहर मोबाइल नहीं ले जा सकेंगी पंचों ने वापस लिया मनमाना फैसला:महिलाओं के स्मार्ट फोन चलाने पर लगाई थी रोक; बोले- बच्चों को देखते हुए निर्णय किया, उल्टा पड़ा भाई दूसरे राज्य में, कैसे करूंगी वीडियो कॉल’:राजस्थान में पंचों का मनमाना फैसला, महिलाएं स्मार्टफोन नहीं चलाएंगी, सरपंच बोले- इस फैसले से महिलाएं पिछड़ेंगी


