53 वर्षीय व्यक्ति की लापरवाह जीवनशैली ने उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाला। उनका वजन 107 किलो तक पहुंच गया, जिससे वेंट्रल हर्निया, फैटी लीवर, जोड़ों का दर्द, स्लीप एपनिया, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याएं उत्पन्न हो गईं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उन्हें दिन में बैठे-बैठे नींद आने लगी। डॉक्टरों की जांच में फैटी लीवर और वेंट्रल हर्निया को इन समस्याओं की जड़ बताया गया। इसके बाद मेटाबॉलिक बैरिएट्रिक सर्जरी की गई, जिससे उनका ब्लड प्रेशर तुरंत सामान्य हो गया। धार निवासी 53 वर्षीय ऑटो डील कारोबारी ओमप्रकाश मिस्त्री ने दो महीने में अपनी जिंदगी में बड़ा बदलाव देखा। मेटाबॉलिक बैरिएट्रिक सर्जरी के बाद उनका वजन 23 किलो कम हो गया, और लगभग सभी बीमारियां खत्म हो गईं। ओमप्रकाश ने बताया कि 45 साल की उम्र तक उनका स्वास्थ्य ठीक था, लेकिन इसके बाद मोटापा तेजी से बढ़ने लगा। मोटापे के कारण शरीर बेडौल हो गया और ज्वाइंट पेन, पूरे शरीर में दर्द, ब्लड प्रेशर और सांस फूलने जैसी समस्याएं शुरू हो गईं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि चलना मुश्किल हो गया और बैठे-बैठे नींद आने लगी। यहां तक कि आंखें खोलना भी कठिन हो गया। जब समस्या असहनीय हो गई, तो उन्होंने इंदौर के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में परामर्श लिया। डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी, अल्ट्रासोनोग्राफी, और ब्लड समेत कई जांचें कीं, जिनसे उनके स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति का पता चला। तीन घंटे चली सर्जरी डॉ. प्रतीक पोरवाल (जीआई, बैरिएट्रिक और लेप्रोस्कोपिक सर्जन) ने जानकारी दी कि मरीज का वजन 107 किलो था। इस स्थिति में मेटाबॉलिक बैरिएट्रिक सर्जरी ही प्रभावी विकल्प था। उन्होंने बताया कि कम उम्र में अधिक वजन के कारण ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, स्लीप एपनिया, घबराहट, जोड़ों का दर्द, गॉल स्टोन, इनफर्टिलिटी और मानसिक समस्याएं आम हो जाती हैं। मरीज की सर्जरी तीन घंटे तक चली। पहले मेटाबॉलिक सर्जरी की गई, जिससे मोटापे को नियंत्रित किया जा सके। इसके बाद वेंट्रल हर्निया की सर्जरी की गई। यह क्रम इस तरह से रखा गया ताकि मोटापे की सर्जरी के दौरान लगे कट, हर्निया सर्जरी में कवर हो जाएं। जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट डॉ. पोरवाल ने बताया कि बैरिएट्रिक मेटाबॉलिक सर्जरी केवल वजन घटाने का उपाय नहीं है। यह सर्जरी शरीर में हार्मोनल संतुलन को बहाल करने में मदद करती है। इसके जरिए फैटी लीवर, ब्लड प्रेशर, और डायबिटीज जैसी समस्याओं को रिवर्स किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में हार्मोन्स के सेल्स और लेवल को नियंत्रित किया जाता है। डॉ. प्रतीक पोरवाल ने बताया कि मेटाबॉलिक बैरिएट्रिक सर्जरी के दौरान भूख और इंसुलिन से जुड़े हार्मोन्स को संतुलित किया जाता है। इससे न केवल वजन घटता है, बल्कि मरीज की कई गंभीर बीमारियां भी ठीक होने लगती हैं। इस केस में, मरीज के बढ़ते वजन के कारण उनकी हड्डियों पर अतिरिक्त दबाव था, जिससे उन्हें चलने-फिरने में कठिनाई होती थी। सर्जरी के बाद यह दबाव कम हुआ और शारीरिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। लीवर डैमेज और सिरोसिस का था खतरा डॉक्टरों का कहना है कि अधिक मोटापा कई गंभीर बीमारियों की जड़ है। यदि ओमप्रकाश मिस्त्री की सर्जरी नहीं की जाती, तो उन्हें लीवर डैमेज, सिरोसिस, और बड़े वेंट्रल हर्निया जैसी जटिल समस्याओं का सामना करना पड़ सकता था। वजन घटा, आत्मविश्वास और मनोस्थिति में सुधार ओमप्रकाश मिस्त्री ने बताया कि पहले मोटापे के कारण उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। वे अधिक काम नहीं कर पाते थे, और मानसिक रूप से भी अशांत रहते थे। सर्जरी के बाद उनकी सेहत में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब वे नियंत्रित डाइट अपना रहे हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं। उन्होंने बताया कि सर्जरी और इलाज में लगभग 4 लाख रुपए का खर्च आया, लेकिन मेडिक्लेम होने से आर्थिक परेशानी नहीं हुई। डॉक्टरों की सलाह: मोटापे से बचाव के उपाय डॉक्टरों के अनुसार, मोटापे से बचने के लिए संतुलित जीवनशैली और सही खानपान बेहद जरूरी हैं। फैट बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें और नियमित हल्का व्यायाम करें। घर का बना स्वास्थ्यवर्धक भोजन प्राथमिकता दें। साथ ही, कैलोरी मॉनिटरिंग के लिए उपलब्ध ऑनलाइन एप्स का उपयोग कर अपनी डाइट पर नजर रखें। यह बदलाव प्रेरणा देता है कि सही कदम उठाने से न केवल सेहत में सुधार होता है, बल्कि आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।


