भोपाल के शिवाजी नगर स्थित अंकुर खेल मैदान पर सोमवार से वैदिक ब्राह्मणों का क्रिकेट मैच शुरू हो गया है। खिलाड़ी जर्सी नहीं, बल्कि धोती-कुर्ता पहनकर मैदान में उतरे हैं। हिंदी या अंग्रेजी की बजाय संस्कृत भाषा में क्रिकेट कमेंट्री की जा रही है। यह आयोजन महर्षि मैत्री मैच शृंखला-6 के तहत 5 से 9 जनवरी तक चलेगा। वैदिक ब्राह्मण युवा खेल कल्याण समिति यह आयोजन परशुराम कल्याण बोर्ड के संयोजन से कर रही है। दोपहर 2 बजे खेल मंत्री विश्वास सारंग ने टूर्नामेंट का शुभारंभ किया। इसके बाद टीमें मैदान में दो-दो हाथ हाजमाने के लिए उतर गईं। बोर्ड के अध्यक्ष विष्णु राजोरिया ने बताया, टूर्नामेंट में पूरे प्रदेश से 24 टीमें हिस्सा ले रही हैं। यह आयोजन लगातार छठे वर्ष किया जा रहा है। मैच दौरान क्रिकेट से जुड़े रोजमर्रा के शब्द भी संस्कृत में बोले जाएंगे। किसे क्या बोल रहे?
पिच- क्षिप्या, बॉल- कन्दुकम्, बैट- वल्लकः, रन- धावनम्, फोर (4 रन)- चतुष्कम्, सिक्स(6 रन)- षठकम्, अंपायर-निर्णायक। पं. धीरेंद्र शास्त्री से मिलेंगे विजेता समिति के कोषाध्यक्ष अवनीश त्रिवेदी ने बताया कि टूर्नामेंट में दिल्ली, महाराष्ट्र से भी टीमें आई हैं। संस्कृत का प्रचार-प्रसार और विस्तार कैसे हो? यह भी टूर्नामेंट में बताया जा रहा है। प्रतियोगिता के विजेता-उप विजेता टीमों को पुरस्कार दिए जाएंगे। मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज पुरस्कार के रूप में श्रीमद भागवत गीता और श्रीरामचरित मानस भेंट की जाएगी। विजेता टीम को बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र शास्त्री से मिलने का मौका मिलेगा। ऐसे आयोजन काशी में हुए
मैच के दौरान खिलाड़ी धोती-कुर्ता के साथ मस्तक पर त्रिपुंड और तिलक लगाए नजर आ रहे हैं। पिच पर रन लेने से लेकर आउट होने तक हर संवाद संस्कृत भाषा में होगा। यह इसे प्रदेश का अनूठा टूर्नामेंट बनाती है।
इससे पहले इस तरह का आयोजन काशी में ही देखने को मिलता रहा है। महर्षि मैत्री समिति का उद्देश्य खेल से भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाना है। भगवान श्रीकृष्ण भी कन्दुक क्रीड़ा यानी गेंद का खेल खेलते थे। पिछले साल भी अंकुर खेल मैदान पर ही यह आयोजन हुआ था।


