छत्तीसगढ़ में मंत्री परिषद की मंजूरी के बाद रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम 23 जनवरी 2026 से लागू होगा। इसे भोपाल और इंदौर की तर्ज पर लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिसिंग को अलग-अलग प्रभावी बनाना है। नगरीय क्षेत्र में पुलिस कमिश्नर होंगे। ग्रामीण क्षेत्र में रायपुर ग्रामीण के लिए अलग से एसपी नियुक्त होगा। दोनों की रिपोर्टिंग, सुपरविजन और कार्य प्रणाली अलग होगी। यानी, कलेक्टर एक होगा, लेकिन पुलिसिंग और मॉनिटरिंग दो अलग-अलग सिस्टम में होगी। रायपुर में जहां 22 शहरी थानों की जिम्मेदारी एक एडिशनल एसपी के पास होती थी, वह जिम्मेदारी अब आईजी रैंक के अधिकारी के पास होगी, जो पुलिस कमिश्नर होंगे। इसमें एक थाना कम हो जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र में 10 थानों की जिम्मेदारी संभालने वाले एडिशनल एसपी की जगह अब आईपीएस अधिकारी को एसपी की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसमें 5 थाने बढ़ जाएंगे। पुलिस कमिश्नर सीधे डीजीपी को रिपोर्ट करेंगे, जबकि ग्रामीण रायपुर के एसपी की रिपोर्टिंग रेंज आईजी को होगी। यह नए रायपुर ग्रामीण रेंज या महासमुंद-बलौदाबाजार रेंज आईजी हो सकते हैं। वहीं, मध्यप्रदेश के भोपाल-इंदौर के कमिश्नरी सिस्टम को रायपुर में लागू करने की तैयारी है। जबकि एमपी शासन इसमें संशोधन करने वाली है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया। वहां पूरे जिले में कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जा रहा है। इसकी वजह फोर्स की कमी और समन्वय है। रायपुर में पुलिसिंग का सेटअप कैसा होगा? थानों और बल का बंटवारा? पुलिस कमिश्नर के अधिकार? पुलिसिंग में बदलाव के बाद क्या रायपुर जिले में कितने पुलिस बल की जरूरत पड़ सकती है? इस एक्सप्लेनर में विस्तार से पढ़िए… एक थाने में 30 बल, 75 की जरूरत राजधानी के अनुरूप रायपुर में पुलिसिंग के लिए कम से कम 75 का स्टाफ होना चाहिए। जबकि वर्तमान में थानों में औसतन 30 से 35 का बल है। अब मौजूदा बल का भी बंटवारा होगा, जिससे फील्ड में फोर्स की कमी आएगी। जिले में दो तरह की पुलिसिंग और अधिकारियों की संख्या बढ़ने पर थानों में बल कम होगा और अधिकारियों के दफ्तरों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ेगी। रायपुर जिले में 7500 से अधिक पुलिस बल की जरूरत बताई जा रही है। कमिश्नरी के लिए होगा अलग बोर्ड मुंबई और दिल्ली में पुलिस कमिश्नर सीधे गृह विभाग और गृहमंत्री को रिपोर्ट करते हैं। पुलिस कमिश्नर होमगार्ड, जेल विभाग और अभियोजन की तरह सीधे शासन से जुड़ा रहता है। कई राज्यों में इसके लिए अलग कमिश्नरी बोर्ड भी है। मजबूत अफसर को बनाएं कमिश्नर: डीएम अवस्थी डीएम अवस्थी, सेवानिवृत्त डीजीपी कहते हैं कि मंत्री परिषद ने कमिश्नरी सिस्टम को मंजूरी दे दी है, लेकिन इसका पूरा खाका सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि किस तरह का सिस्टम लागू होगा। शासन को मजबूत अधिकारी को कमिश्नर बनाना चाहिए, जिससे पुलिसिंग में सुधार आए। यदि नगरीय निकाय क्षेत्र में ही कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जा रहा है तो यह बेहतर है, क्योंकि देहात और शहर की पुलिसिंग व समस्याएं अलग-अलग हैं। यह एक तरह से पायलट प्रोजेक्ट होगा। इसके सफल होने पर अन्य शहरों में भी इसे लागू किया जा सकता है। भविष्य में इसमें संशोधन कर पूरे जिले में कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जा सकता है। पुलिस को कमिश्नर के पूरे अधिकार मिलने चाहिए, ताकि प्रभावी ढंग से पुलिसिंग हो सके। डिप्टी सीएम शर्मा ने चलाई कमिश्नरी के लिए नोटशीट डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने पूरे रायपुर जिले में कमिश्नरी सिस्टम के लिए नोटशीट चलाई है। वे पुलिस कमिश्नर को पूरे जिले का अधिकार देना चाहते हैं, जो दिल्ली, मुंबई, भुवनेश्वर के कमिश्नर के पास है। चर्चा है कि आईएएस एसोसिएशन अपने अधिकारियों में कटौती नहीं चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने सीएम से मुलाकात की है। इसी वजह से रायपुर में मजबूत कमिश्नरी सिस्टम लागू नहीं हो रहा है। कमेटी ने की थी सिफारिश, पर लागू होगा कमजोर सिस्टम एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता वाली कमेटी ने भी रायपुर के क्षेत्रफल, जनसंख्या और क्राइम रेट के आधार पर पूरे जिले में कमिश्नरी सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव भेजा है। क्योंकि रायपुर जिला इतना बड़ा नहीं हैं, जो पुलिस की दो तरह की व्यवस्था रहे। उन्होंने भुवनेश्वर के कमिश्नरी सिस्टम की अनुशंसा की है। लेकिन उनके प्रस्ताव पर आज तक कोई चर्चा नहीं है। न ही गृह विभाग से कमेटी को बुलाकर रिपोर्ट पर जानकारी ली गई और चर्चा की गई। कमिश्नर प्रणाली में पुलिस के पास और क्या-क्या ताकत ? पुलिस कमिश्नर प्रणाली में कमिश्नर को कलेक्टर जैसे कुछ अधिकार मिलते हैं। वे मजिस्ट्रेट की तरह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर सकते हैं। कानून के नियमों के तहत दिए गए अधिकार उन्हें और भी प्रभावी बनाते हैं। इससे कलेक्टर के पास लंबित फाइलें कम होती हैं। फौरन कार्रवाई संभव होती है। इस प्रणाली में पुलिस को शांति भंग की आशंका में हिरासत, गुंडा एक्ट, या राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) जैसी धाराएं लगाने का अधिकार मिलता है। होटल, बार और हथियारों के लाइसेंस जारी करने, धरना-प्रदर्शन की अनुमति, दंगे में बल प्रयोग और जमीन विवाद सुलझाने तक के निर्णय पुलिस स्तर पर लिए जा सकते हैं। दूसरे राज्यों में कैसे चलता है पुलिस कमिश्नर सिस्टम ? राजस्थान में एसीपी को प्रतिबंधात्मक धाराओं से जुड़े केसों में सुनवाई करने का और फैसला करने का अधिकार दिया गया है। कमिश्नरेट में ही न्यायालय लगता है। इनमें से ज्यादातर धाराएं शांतिभंग या पब्लिक न्यूसेंस रोकने से जुड़ी हैं। इन मामलों में जमानत देने या न देने का फैसला पुलिस अधिकारी ही करते हैं। महाराष्ट्र के नागपुर में पुलिस कमिश्नर के पास अपराधियों को जिला बदर करने, जुलूस और जलसों की अनुमति देने, किसी भी जगह को सार्वजनिक स्थल घोषित करने, आतिशबाजी करने की अनुमति के अधिकार हैं। संतान गोद लेने की अनुमति भी नागपुर में पुलिस कमिश्नर ही देता है। यूपी के लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और नोएडा में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू है। वहां 14 एक्ट के अधिकार पुलिस को दिए गए हैं। सीआरपीसी की धारा 133 और 145 के तहत पब्लिक न्यूसेंस को काबू में करने के लिए एहतियाती कदम उठाना जैसे अधिकार भी प्रशासन से पुलिस को दे दिए गए हैं। ………………………. इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… रायपुर में 23 जनवरी से लागू होगा कमिश्नर सिस्टम: राइस मिलर्स को राहत, एक्सपो से गाड़ी खरीदने पर छूट; पढ़िए साय कैबिनेट के 10 फैसले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बैठक की अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में कैबिनेट बैठक हुई। बैठक में 10 महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नर प्रणाली 23 जनवरी से लागू करने का निर्णय लिया गया है। पढ़िए पूरी खबर


