जंग जीतने जैसी खुशी का अहसास:कैंसर पीड़िता को पीएमओ के हस्तक्षेप से बिल्डर को लौटाने पड़े 19 लाख 95 हजार रुपए

हाल ही में नए साल पर अस्पताल से घर लाैटी रिटायर्ड प्राेफेसर शशि सहाय (68) बेहद खुश और उत्साहित है। वाे भले ही बैड पर है लेकिन एक जंग जीतने जैसी खुशी का अहसास उनके चेहरे पर है। शशि करीब पिछले 3 साल से ऑक्सिजन सपाेर्ट पर है और ब्रेस्ट कैंसर से जूझते हुए बैड रेस्ट पर है। दरअसल 2019 में उन्हाेंने दिल्ली, द्वारिका स्मार्ट सिटी प्रॉजेक्ट में एक फ्लेट खरीदा था। रिटायरमेंट के बाद मिली ग्रेच्यूटी राशि से 19 लाख 95 हजार रूपए एक बिल्डर समूह काे दिए थे। खरीद के समय कंपनी की तरफ से दावा किया गया था कि 2 से 3 साल में फ्लेट तैयार किए जाएंगे। बिल्डर घाेषित समय पर डिलीवरी नहीं दे सका। उधर शशि भी बीमार पड़ गई। शशि ने कई बार बिल्डर ग्रुप से राशि वापस लाैटाने की मांग रखी । पत्र व्यवहार करके खुद की मजबूरी बताई। काेई सुनवाई नहीं हाेने के बाद दिल्ली रेरा में भी शिकायतें की। मामला चलता रहा। इस बीच उन्हाेंने पीएम ग्रिवांस सेल में शिकायत दर्ज कराई। साथ ही पीएम नरेंद्र माेदी काे व्यक्तिगत ताैर पर पत्र भी लिखा। ऐसे में पीएमओ से रेस्पाॅंस मिला। दिल्ली पुलिस हैडक्वाटर ने मामले काे टेकअप करके पीड़िता काे रिप्लाई भेजा। इसमें बताया गया कि एसआई ज्याेति यादव काे विशेष रूप से केस लिए लगाया गया है। इसके बाद ज्याेति ने शशि के हालात और दर्द काे समझा। अस्पताल में इलाज ले रही शशि काे तुरंत मदद कराने के लिए बिल्डर समूह पर राशि लाैटाने का दबाव बनाया। शिकायत के पहले महीने के अंदर ही करीब 5 लाख रूपए शशि वापस दिलवाई। इसके बाद शेष बचे 14 लाख 95 हजार 4 महीने के अंदर दिसंबर 2024 तक पीड़िता काे दिलवाएं गए है। शशि का कहना है कि एक बार ताे आस छाेड़ दी थी लेकिन पीएम काे पत्र और ग्रिवांस सेल में शिकायत का असर ऐसा रहा कि एक महीने के अंदर ही एक्शन देखने काे मिला। उन्हें रुपयाें की सबसे ज्यादा जरुरत थी तब उन्हें अटके हुए रूपए मिलना एक बड़ी राहत की तरह रही। बस अब कैंसर के खिलाफ जंग जारी है। गाैरतलब है कि प्राे. शशि प्रदेश की राजस्थान यूनिवर्सिटी में फेक्लटी रह चुकी है।

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