ठंड और पॉल्यूशन का असर…लौट रहा वायरल:खांसी रुक नहीं रही, तय समय पर बदन दर्द के साथ चढ़ रहा बुखार; रिकवरी स्लो

राजधानी समेत मध्यप्रदेश में घना कोहरा और तेज ठंड का मौसम बना हुआ। भोपाल में चारो ओर धूल की समस्या बनी हुई है। इसके अलावा AQI भी 230 तक पहुंच रहा है। यह सभी फैक्टर मिलकर इस बार के वायरल को मजबूत बना रहे हैं। जिसकी वजह से कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग बार बार सर्दी-खांसी, जुकाम, बुखार के साथ सांस फूलने और सीने में जकड़न की समस्या से ग्रसित हो रहे हैं। जेपी अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, बीते सालों की तुलना में इस साल ठंड में एलर्जिक राइनाइटिस के केस दो गुना ज्यादा सामने आ रहे हैं। इसकी बड़ी वजह पॉल्यूशन और धूल है। जेपी अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पियु पंचरत्न ने कहा कि मौजूदा वायरस पहले के मुकाबले ज्यादा ताकतवर है, इसलिए बच्चों को ठंड से बचाकर रखना बेहद जरूरी है। अगर इसके बावजूद ठंड या वायरल से जुड़ी कोई परेशानी नजर आए, तो बिना देर किए नजदीकी डॉक्टर को दिखाना चाहिए और उनकी सलाह के अनुसार इलाज शुरू करना चाहिए। पॉल्यूशन से हालात गंभीर, बुजुर्ग मरीज ज्यादा परेशान
सर्दी बढ़ते ही अस्पतालों की ओपीडी में दिल और सांस से जुड़ी शिकायतों के मरीज 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। पहले हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में 150 के करीब ह्रदय रोगी पहुंच रहे थे। अब यह संख्या बढ़कर 200 के करीब पहुंच गई है। डॉक्टरों के अनुसार, ज्यादातर मरीजों में सर्दी-खांसी, जुकाम, बुखार के साथ सांस फूलने और सीने में जकड़न की समस्या शुरुआती लक्षण के रूप में नजर आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड का असर सीधे फेफड़ों और दिल पर पड़ता है। जेपी अस्पताल के श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. नवीन शर्मा ने बताया कि ठंडी हवा जब नाक के रास्ते फेफड़ों तक पहुंचती है, तो वह सांस की नलियां सिकुड़ कर सकरी हो जाती हैं। इसे मेडिकल भाषा में ब्रोन्कोकन्सट्रिक्शन कहा जाता है। इससे सबसे अधिक प्रभावित अस्थमा और सीओपीडी के पुराने मरीज होते हैं। इनके अलावा वे मरीज भी इसकी चपेट में आते हैं जिनमें इन दोनों बीमारी की शुरुआत हो चुकी होती है। इन मरीजों में सबसे आम लक्षणों में सांस फूलना, खांसी बढ़ना और सीने में भारीपन होना है। ठंड में सांस की दिक्कत क्यों बढ़ी
इस समस्या को एयर पॉल्यूशन और गंभीर बना देता है। खासकर सुबह और शाम के समय जब प्रदूषण का स्तर ज्यादा होता है, तब बाहर निकलने पर सांस से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। अस्पतालों में सबसे ज्यादा 50 से 60 साल से ऊपर के मरीज पहुंच रहे हैं। खासकर वे लोग, जिन्हें पहले से अस्थमा, सीओपीडी या दिल से जुड़ी बीमारी है। बुजुर्गों में ठंड और प्रदूषण दोनों मिलकर परेशानी बढ़ा रहे हैं। बच्चों में भी सर्दी-खांसी और सांस की हल्की दिक्कत के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन गंभीर मरीजों में बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है। बच्चों में रिकवरी हो रही देरी से जेपी अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पियूष पंचरत्न ने कहा कि इन दिनों में बच्चों में वायरल संक्रमण के मामलों में बदलाव साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। पहले जहां बच्चे भर्ती होने के 3 से 4 दिन के भीतर ठीक होकर घर लौट जाते थे, अब उनकी रिकवरी में अपेक्षाकृत ज्यादा समय लग रहा है। मौजूदा मामलों में बच्चों को पूरी तरह ठीक होने में करीब 7 से 10 दिन का समय लग रहा है। कई मरीजों में यह समय 15 दिन से अधिक भी देखा जा रहा है। डॉ. पियूष पंचरत्न के अनुसार, नए वायरस के कारण रिकरेंस, यानी बार-बार संक्रमण के मामले बढ़े हैं। आशंका जताई जा रही है कि वायरस लगातार म्यूटेट हो रहा है, जिससे बीमारी की पहचान और सटीक डायग्नोसिस करने में समय लग रहा है। इसका सीधा असर इलाज की अवधि पर पड़ रहा है, जो पहले की तुलना में बढ़ गई है। ये खबर भी पढ़ें… 3 वायरस एक्टिव, बच्चे हो रहे बीमार अचानक तेज बारिश, धूप और बादल…मौसम के ये तीन रूप देखने को मिल रहे हैं। जैसे-जैसे मौसम में बदलाव हो रहा है वैसे-वैसे ही तीन वायरस सक्रिय हो रहे हैं। ये वायरस ज्यादातर बच्चों को प्रभावित कर रहे हैं। बच्चों में तेज बुखार, शरीर दर्द, उल्टी-दस्त जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं।पूरी खबर पढ़ें

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