डकैतों की शरणस्थली रहे चंबल के बीहड़ अब पर्यटन स्थल बन गए हैं। यहां पानसिंह, मलखान सिंह, फूलनदेवी, निर्भय गुर्जर, सीमा परिहार जैसे डकैतों की जिंदगी को पर्यटक करीब से जानने के लिए पहुंच रहे। वे डकैतों की तरह वर्दी पहनकर और हाथों में लकड़ी की बंदूकें लेकर बीहड़ के ऊबड़-खाबड़ क्षेत्रों में ट्रैकिंग कर रहे हैं। इसके लिए चंबल-इटावा सर्किट विकसित किया जा रहा है। इसे ‘रोमांसिंग द डैकोइट्स लैंड’ नाम दिया गया है। पर्यटकों को डकैतों के रुकने के प्रमुख ठिकाने, पकड़ (अपहरण कर लाए गए व्यक्ति) को रखने वाली जगह, खाना पकाने के प्वॉइंट और कालिका माता का मंदिर दिखा रहे हैं। ‘अनुभव’ संस्था ने स्थानीय बुजुर्गों की मदद से इन्हें चिह्नित किया है। संस्था के निदेशक निहाल सिंह चौहान बताते हैं कि आसपास के क्षेत्रों को मप्र पर्यटन विभाग विकसित कर रहा है। चंबल यमुना ईकोटूरिज्म प्रोजेक्ट के तहत रघुनाथपुर में डकैत संग्रहालय तैयार किया जाएगा। यहां डकैतों की वर्दी, ड्रेस, उनके खाने-पकाने के बर्तन, हथियार व चिट्ठियां भी संरक्षित की जाएंगी। जगह चिह्नित कर ली गई है। जल्द जनभागीदारी से संग्रहालय बनना शुरू होगा। दो रात, 3 दिन का है पैकेज, प्रति व्यक्ति 3500 रुपए इस सर्किट में 2 रात और 3 दिन का टूरिस्ट पैकेज तैयार किया गया है। प्रति व्यक्ति 3500 रुपए में ग्वालियर से यात्रा शुरू कर इटावा तक आने-वाले 10 से 12 स्पॉट्स कवर किए जा रहे हैं। क्रोकोडाइल सफारी, इटावा सफारी, कुण्डेश्वर महादेव, कुंडार वाले बाबा, वॉचिंग टावर, मां कालिका टेंपल, वरहेश्वर महादेव, शाकम्बरी मंदिर, मैकासुर की तपोस्थली और महाभारतकालीन खेड़ा गांव शामिल हैं। ये सुविधाएं : पर्यटकों को नाइट कैंपिंग, चंबल रिवाइंस में ट्रैकिंग, 400 साल पुराने मड हाउस में स्टे, होमस्टे, फिशिंग, बोटिंग, कल्चरल इवेंट्स, हनी बी फॉर्मिंग, स्थानीय व्यंजन की सुविधाएं दे रहे हैं।


