108 एंबुलेंस का हाल : रस्सी से बंधा दरवाजा, जंग लगे स्ट्रेचर पर मरीज

झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा अक्सर विवादों में रहती है। कभी मरीजों को समय पर सेवा नहीं मिलने के कारण तो कभी अपने कर्मियों को वेतन तक नहीं देने के कारण। मरीजों के परिजन भी अक्सर शिकायत करते हैं कि जिस एंबुलेंस में बैठे थे, उसका वेंटिलेटर खराब था या स्ट्रेचर टूटा हुआ था। दैनिक भास्कर ने इसकी पड़ताल की। लगभग हर जिले से मरीजों को लेकर रिम्स आने वाली एंबुलेंसों की स्थिति की जांच की। इसके बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि झारखंड में 108 एंबुलेंस को खुद इलाज की दरकार है। राज्य के विभिन्न जिलों में तैनात दर्जनों एंबुलेंस की बॉडी में जंग लग चुका है। 100 से ज्यादा एंबुलेंस के स्ट्रेचर डैमेज हैं। स्ट्रेचर तक में जंग लगा हुआ है। एंबुलेंस चालकों ने कहा कि लंबे समय से एंबुलेंसों की सर्विसिंग नहीं कराई गई है। कुछ महीनों के अंतराल पर सिर्फ छोटे-मोटे काम कराए जाते हैं। 70 से ज्यादा गाड़ियों की एसी काम नहीं करती… राज्य में संचालित 543 एंबुलेंस में से 70 से ज्यादा एंबुलेंस की स्थिति ऐसी है कि इनमें एसी तक काम नहीं करती। इनकी एसी दो साल से भी अधिक समय से खराब पड़ी हुई है। कुछ गाड़ियों की बैटरी जवाब दे रही है, थोड़ी देर गाड़ी खड़ी रहने के बाद बैटरी करंट छोड़ देती है। कई बार एंबुलेंसों को धकेल कर स्टार्ट करने की नौबत आती है। शिकायत के बाद एजेंसी ने कुछ गाड़ियों की बैटरी बदली थी, जबकि तीन से चार दर्जन गाड़ी ऐसी हैं जिसकी बैटरी ठीक नही कराई गई है। क्या कहते हैं जिम्मेवार… 108 सेवा होगी बेहतर, निजी एंबुलेंस भी जुड़ेंगी 10 दिन पहले ही 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर हुई थी बैठक : इधर, लगातार 108 एंबुलेंस सेवा की शिकायतें मिलने के बीच बीते 26 दिसंबर को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बैठक की थी। बैठक के दौरान जर्जर पड़ी एंबुलेंसों को लेकर अपर मुख्य सचिव ने डेंटिंग- पेंटिंग व मरम्मत कराने के निर्देश दिए थे। पर 10 दिन बाद भी अबतक एंबुलेंस की मरम्मत शुरू नहीं की गई है। देखें किस स्थिति में है लाइफलाइन 108… ईंटों के सहारे टिका है स्ट्रेचर टूटा हुआ गेट, अंदर सीट भी टूटी हुई एंबुलेंस नं.: जेएस01 सीएच-8559 एंबुलेंस नं.: जेएच 01 सीएच-9367 एंबुलेंस बाहर से दिखने में ठीक कं​डिशन में है, लेकिन अंदर से न तो स्ट्रेचर ठीक है और न कोई अन्य सुविधा है। मरीज के परिजन के बैठने वाली सीट से फॉम फट कर अलग हो चुका है। अंदर का रॉड दिखाई दे रहा है। परिजन अपनी चादर सीट पर बिछाकर इस पर बैठते हैं। एंबुलेंस में मरीज को किसी तरह स्ट्रेचर पर लेटाया जाता है, लेकिन परिजन को इसमें खड़े होकर अस्पताल पहुंचना पड़ता है। क्योंकि इस एंबुलेंस में सीट पूरी तरह उजड़ चुकी है। स्थिति यह भी दिखी कि मरीज को अंदर बैठाने के बाद उसके दरवाजे को रस्सी से बांधने की नौबत आ गई।

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