ज्ञान परंपरा में बहुजन चिंतन का समावेशन जरूरी : जूली

जयपुर | पिसार संस्थान जयपुर की ओर से कांस्टीट्यूशन क्लब में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि किस तरह से बहुजन चिन्तन को सदियों से हाशिये पर धकेला जा रहा है। हम भारतीय ज्ञान परम्परा में बहुजन साहित्य को समावेशी नीति के तहत यथोचित स्थान दिलाने के लिए संघर्ष करेंगें, क्योंकि विकसित भारत के लिए सबको साथ में लेना अपरिहार्य है। संगोष्ठी संयोजक प्रो. मंजू सिंह ने एक थिंक टैंक के रूप में पिसार के स्थापना की आवश्यकता एवं इसके उद्देश्यों के बारे में बताया। आयोजन सचिव केसी सामोता ने भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्वविद्यायलों में अधिक समावेशी बनाने पर बल दिया। प्रो. रविकांत ने बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा सभी जातियों की एकता की विचार प्रक्रिया के बारे में बताया गया। प्रो. करोरी सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा की पुनर्स्थापना में आने वाली चुनौतियों के बारे में बताते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा की पुनर्स्थापना करने पर बल दिया। सेमिनार में “राजस्थान की राजनीति” पुस्तक का विमोचन किया गया। डॉ. गजेंद्र सिंह ने आभार व्यक्त किया।

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