अजमेर/जयपुर | सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर दरगाह में प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों द्वारा सालाना उर्स में चादर चढ़ाने से रोकने वाली अर्जी खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अर्जी न्यायसंगत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए अजमेर की अदालत में प्रार्थना पत्र निस्तारित करवाने के बाद कोई कार्रवाई अमल में लाने के लिए उचित विधिक प्रक्रिया अपनाने का आदेश दिया। कोर्ट ने साफ किया कि मौजूदा पिटीशन के खारिज होने का अजमेर कोर्ट में पेंडिंग सिविल केस कोई असर नहीं पड़ेगा। अजमेर दरगाह में पीएम सहित अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की ओर से उर्स के दौरान चादर पेश किए जाने पर रोक की मांग को लेकर याचिका पर 21 फरवरी को सुनवाई होगी। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के उस अर्जी को अर्जेंट लिस्ट करने से मना करने के कुछ हफ्ते बाद आया, जब अजमेर दरगाह में 814वें सालाना उर्स से पहले 22 दिसंबर को तुरंत सुनवाई के लिए इसका जिक्र किया गया था। हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता द्वारा पेश की गई याचिका में बताया कि था कि अजमेर की जिला अदालत में दरगाह परिसर में संकट मोचन मंदिर होने और उसमें पूरा अर्चना के अनुमति के संबंध में वाद की सुनवाई विचाराधीन है।


