चंडीगढ़ में एसएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) की तैनाती को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अब तक चली आ रही परंपरा के अनुसार एसएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) की नियुक्ति पंजाब कैडर से डेपुटेशन पर की जाती रही है, जबकि एसपी ट्रैफिक एंड सिक्योरिटी हरियाणा कैडर से नियुक्त होते रहे हैं। हालांकि अब आगे भी यही व्यवस्था बनी रहे, यह जरूरी नहीं रह गया है। नियमों के मुताबिक गवर्नर चाहें तो चंडीगढ़ को यूटी कैडर का एसएसपी भी मिल सकता है, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके। दरअसल, करीब तीन महीने पहले चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से इस संबंध में एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसमें स्पष्ट किया गया कि ग्रुप-ए श्रेणी के आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की तैनाती अब किसी भी पोस्ट पर गवर्नर, यानी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया द्वारा की जा सकती है। अधिकारी जिस पद के लिए डेपुटेशन पर चंडीगढ़ आए हों, यह अनिवार्य नहीं होगा कि उन्हें उसी पद पर तैनात किया जाए। मौजूदा एसएसपी कंवरदीप कौर का तीन साल का कार्यकाल मार्च में पूरा हो रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक पंजाब से नए एसएसपी के लिए पैनल तक नहीं मंगवाया गया है। वहीं दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि मौजूदा एसएसपी अपने कार्यकाल को आगे बढ़ाने के प्रयास कर रही हैं। ऐसे में यूटी कैडर के एसएसपी की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। पहले भी उठ चुकी यूटी कैडर के एसएसपी की मांग यह पहली बार नहीं है, जब यूटी कैडर के एसएसपी की मांग सामने आई हो। पिछले गवर्नर के कार्यकाल के दौरान भी गुड गवर्नेंस और अधिकारियों के बीच खींचतान को खत्म करने के लिए गृह मंत्रालय को चिट्ठी भेजी गई थी। उस समय भी साफ तौर पर कहा गया था कि चंडीगढ़ में एसएसपी की पोस्ट पर यूटी कैडर का ही अधिकारी लगाया जाना चाहिए। मार्च में कार्यकाल खत्म, नहीं आया नया पैनल मौजूदा एसएसपी कंवरदीप कौर का 3 साल का कार्यकाल मार्च में पूरा हो रहा हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अभी तक पंजाब से नए एसएसपी के लिए पैनल तक नहीं मंगवाया गया है। वहीं दूसरी ओर चर्चा है कि मौजूदा एसएसपी अपने कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। ऐसे में यूटी कैडर के एसएसपी की संभावना को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। डिस्टर्ब एरिया का टैग हटा, फिर यूटी कैडर क्यों नहीं चंडीगढ़ से डिस्टर्ब एरिया का कलंक हटे कई साल हो चुके हैं। इसके बावजूद एसएसपी की पोस्ट पर अब भी पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारियों की तैनाती होती आ रही है। जबकि हकीकत यह है कि यह पोस्ट न तो 60-40 के किसी फॉर्मूले की है और न ही इस पर किसी राज्य का अधिकार है। चंडीगढ़ पुलिस के गठन के समय यह पद पूरी तरह यूटी कैडर के लिए ही निर्धारित था। आतंकवाद के दौर में चंडीगढ़ को डिस्टर्ब एरिया घोषित किया गया था। उस समय खालिस्तानी आतंकवाद से निपटने के लिए पहली बार पंजाब कैडर के आईपीएस सुमेध सिंह सैनी को यहां तैनात किया गया। उससे पहले चंडीगढ़ में एसएसपी की जिम्मेदारी यूटी कैडर के आईपीएस अधिकारी ही संभालते थे। सैनी के तबादले के बाद से लगातार पंजाब कैडर के अधिकारी ही एसएसपी बनाए जाते रहे और यूटी कैडर के लिए कभी गंभीर पैरवी नहीं हुई। अब फिर से यूटी कैडर को मौका देने की मांग अब जब चंडीगढ़ में आतंकवाद का दौर खत्म हो चुका है और डिस्टर्ब एरिया का टैग भी हट चुका है, तो एक बार फिर यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि एसएसपी की पोस्ट यूटी कैडर को क्यों न लौटाई जाए। नियमों और हालिया नोटिफिकेशन के बाद गेंद पूरी तरह गवर्नर के पाले में है।


