भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा गीदम वेयरहाउस में चावल खराब होने के मामले में अब चौंकाने वाली परतें खुलती जा रही हैं। जिस लापरवाही और अव्यवस्था के चलते पहले ही करीब 30 हजार क्विंटल चावल खराब हो चुका है, उसी कड़ी में अब गीदम संग्रहण केंद्र में पिछले एक साल से पड़ा 1200 क्विंटल जैविक धान अब मिलिंग के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है, जबकि यह धान पहले ही खराब होने की स्थिति में पहुंच चुका है। जानकारी के अनुसार यह धान पिछले वर्ष खरीदी का है, जो बारिश में भीग गया था। बाद में केवल प्लास्टिक कवर डालकर इसे बचाने की औपचारिक कोशिश की गई। अब हालात यह हैं कि धान लाल पड़ चुका है, जिससे चावल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह धान धमतरी की अलग-अलग राइस मिलों से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसे अब मिलिंग कर फिर से गीदम वेयरहाउस में जमा किया जाएगा। विडंबना यह है कि गीदम वेयरहाउस में इससे पहले जो चावल खराब हुआ, वह भी इसी तरह के घटिया और संदिग्ध धान से मिलिंग होकर आया था। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि खराब धान को खपाने का खेल एक बार फिर दोहराया जा रहा है। संग्रहण केंद्र प्रभारी टोमेश्वर ठाकुर ने बताया धमतरी का धान पिछले साल का बचा हुआ है, मिलर्स का धान है खराब होगा तो उनकी जवाबदारी है। आंकड़ों में गड़बड़ी {गीदम संग्रहण केंद्र में पड़ा धान: 1200 क्विंटल {पहले से खराब चावल: करीब 30 हजार क्विंटल {धान की स्थिति: भीगा, लाल पड़ा, गुणवत्ता संदिग्ध बड़े सवाल {खराब धान की मिलिंग की अनुमति किसने दी? {क्वालिटी इंस्पेक्टर ने चावल कैसे पास किया? {पीडीएस में पहुंचा घटिया चावल, जिम्मेदार कौन? उठाव से लेकर वेयरहाउस तक ‘सेटिंग’ का खेल धान खरीदी से लेकर चावल जमा करने तक पूरी प्रक्रिया अब संदेह के घेरे में है। सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में कोचियों का धान किसानों के नाम पर खरीदा जाता है। इसके बाद राइस मिलर इसे घटिया बताकर रिजेक्ट कर देते हैं। यहीं से शुरू होता है दूसरा खेल धान के उठाव को लेकर ट्रांसपोर्ट और अधिकारियों के बीच सेटिंग, फिर घटिया धान से चावल बनाकर उसे क्वालिटी इंस्पेक्टर की बिना जांच पासिंग के जरिए वेयरहाउस तक पहुंचा दिया जाता है। वेयरहाउस में मौजूद चावल की गुणवत्ता को लेकर अब राइस मिलर, क्वालिटी इंस्पेक्टर व वेयरहाउस प्रबंधन सवालों के घेरे में हैं। जैविक धान के दावों पर भी सवाल उठने लगे दंतेवाड़ा जिले को 100 प्रतिशत जैविक धान उत्पादन वाला जिला बताया जाता है। कृषि और खाद्य विभाग का दावा है कि पीडीएस के माध्यम से हितग्राहियों को जैविक चावल दिया जा रहा है। लेकिन गीदम वेयरहाउस में खराब हुए चावल ने इन दावों की पोल खोल दी है। सवाल यह भी है कि जब जैविक धान का उत्पादन सीमित होता है, तो पिछले वर्षों में इतनी भारी मात्रा में धान खरीदी कैसे हो गई और इस साल खरीदी आधी भी क्यों नहीं हो पाई? गड़बड़ी उजागर होने के बाद अब मिलर खरीदी केंद्रों में पहले धान की जांच कर रहे हैं, तब जाकर उठाव शुरू हुआ है।


