नागौर ग्राम पंचायत अमरपुरा में मूलभूत सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता के चलते ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। मंगलवार को बड़ी संख्या में एकत्रित ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर गांव की बदहाली पर गहरा आक्रोश जताया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी 14 सूत्रीय मांगों पर जल्द ही सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन और धरने के लिए मजबूर होंगे। जर्जर सड़कें और जलभराव बनी मुसीबत ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, गांव के मुख्य मार्ग और सार्वजनिक चौक-चौराहों में गंदा पानी जमा होने से आम जनजीवन दूभर हो गया है। विशेष रूप से तेजाजी मंदिर के सामने की मुख्य सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, जिसके कारण आए दिन दुपहिया वाहन चालक फिसलकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा मुक्तिधाम और महादेव वाटिका में लगाए गए पौधों के लिए पानी की व्यवस्था न होने से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी धक्का लग रहा है। स्वच्छता और महिला सुरक्षा के दावों की खुली पोल स्वास्थ्य और स्वच्छता के मोर्चे पर भी गांव की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उप स्वास्थ्य केंद्र में शौचालय की व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीण महिलाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, विद्यालय में बना ‘पिंक टॉयलेट’ भी उचित रखरखाव के अभाव में अनुपयोगी पड़ा है। गांव में नियमित कचरा संग्रहण और नालियों की सफाई की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। पंचायत की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवाल ज्ञापन में पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत मुख्यालय न तो समय पर खुलता है और न ही वहां नियमित बैठकें होती हैं, जिससे विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत स्वीकृत ‘ओपन जिम’ का कार्य और सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों पर सी.सी. ब्लॉक निर्माण के कार्य अब तक अधूरे हैं। आंदोलन की राह पर ग्रामीण ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पूर्व में भी कई बार पंचायत प्रशासन को इन समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में सुकदेव, डूंगरराम सारण, मोहनराम, सुरेश, बुधाराम सहित दर्जनों ग्रामीण शामिल रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से प्रशासन से जल्द से जल्द राहत पहुंचाने की मांग की है।


