पंजाब के मानसा जिले के कई गांवों में किसानों ने पारंपरिक फसलों को छोड़कर सब्जियों की खेती शुरू की है। हालांकि सब्जियों के लिए उचित मंडीकरण न मिलने के कारण किसानों को भारी निराशा का सामना करना पड़ रहा है। किसान मंडीकरण की सुविधा और इन फसलों पर सरकारी सब्सिडी देने की मांग कर रहे हैं। करीब एक लाख रुपए का खर्च जिले के भैणी बाघा, बुर्ज राठी, बुर्ज ढिलवां, उभा, जवा-हरके और ठूठियावाली जैसे गांवों में किसानों ने हजारों एकड़ में शिमला मिर्च, खरबूजा, मटर और तरबूज जैसी सब्जियां उगाई हैं। किसान जसपाल सिंह और अर्शदीप सिंह ने बताया कि बीज से लेकर फसल तैयार होने तक प्रति एकड़ पर करीब एक लाख रुपए का खर्च आता है। फसल तैयार होने के बाद मंडीकरण की सुविधा न होने से उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाता। बाहरी व्यापारी कर रहे रेट तय किसानों के अनुसार, शिमला मिर्च खरीदने के लिए बाहरी व्यापारी आते हैं, जो आपस में मिलकर मनमाने रेट तय करते हैं। इससे किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पाता। किसान नेता गोरा सिंह ने जानकारी दी कि मानसा के गांव भैणी बाघा में पिछले लगभग 20 वर्षों से शिमला मिर्च की खेती की जा रही है। पहले यहां करीब 700 एकड़ में इसकी खेती होती थी, लेकिन सब्सिडी और मंडीकरण की सुविधा न मिलने के कारण किसानों को उचित भाव नहीं मिला। किसानों ने शिमला मिर्च की खेती घटाई बाहरी व्यापारी किसानों से कम दाम पर फसल खरीदकर आगे ऊंचे रेट पर बेचते हैं। मुनाफे की कमी के चलते किसानों ने शिमला मिर्च की खेती घटा दी है और अब यह केवल लगभग 100 एकड़ में ही सिमट गई है। सब्जी की खेती में अधिक मेहनत और लागत लगती है, लेकिन मंडीकरण और सब्सिडी के अभाव में किसानों को लाभ नहीं हो पा रहा है, जिससे वे आर्थिक बोझ तले दबते जा रहे हैं। कई बार उन्हें मजबूरी में अपनी फसल सड़कों पर फेंकनी पड़ती है।


