ग्वालियर के एडवोकेट अनिल मिश्रा पर FIR का विरोध:लहार में अधिवक्ताओं ने किया प्रदर्शन, बोले- जिसे फरियादी बनाया वहीं बदमाश

ग्वालियर के अधिवक्ता अनिल मिश्रा एवं उनकी टीम के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में मंगलवार को भिंड जिले की लहार तहसील में अधिवक्ता संघ के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में अधिवक्ता जमा होकर लहार एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने विरोध दर्ज कराते हुए एसडीएम को ज्ञापन दिया। इस दौरान ग्वालियर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और “अनिल मिश्रा जिंदाबाद” के नारे लगाए गए। खनियाधाना की घटना से जुड़ा है मामला अधिवक्ताओं ने बताया कि यह पूरा मामला शिवपुरी जिले के खनियाधाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां बीते दिनों भीम आर्मी द्वारा मनुस्मृति जलाए जाने की घटना सामने आई थी। इस घटना के बाद श्रवण समाज में भारी आक्रोश फैल गया था। इसी क्रम में ग्वालियर के अधिवक्ता अनिल मिश्रा सहित कई समाजसेवी, बार एसोसिएशन और विभिन्न राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने एकजुट होकर विरोध स्वरूप भीमराव सकपाल का पुतला दहन किया था। अधिवक्ताओं ने कार्रवाई को बताया एकतरफा पुतला दहन की इस घटना के बाद भीम आर्मी के पदाधिकारी मकरंद बौद्ध द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई, जिस पर ग्वालियर पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। इसी कार्रवाई के विरोध में लहार तहसील के अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए इसे एकतरफा कार्रवाई बताया। अधिवक्ताओं का कहना है कि जिस व्यक्ति को पुलिस ने फरियादी बनाया है, वहीं छात्र बदमाश है और उसके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद पुलिस ने उसकी कथित झूठी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि जब यह मामला सार्वजनिक हुआ तो ग्वालियर पुलिस प्रशासन हरकत में आया और झूठी शिकायत करने वाले मकरंद बौद्ध, जो कि कथित तौर पर वारंटी अपराधी है, उसे गिरफ्तार किया गया। प्रदेश स्तर पर आंदोलन की चेतावनी वकीलों ने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई अधिवक्ताओं को दबाने और डराने की साजिश के तहत की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मनुस्मृति जैसे धार्मिक ग्रंथ को जलाने वालों के खिलाफ अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि मनुस्मृति जलाने वालों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इस मौके पर एडवोकेट देवेंद्र त्रिपाठी, ओमशंकर चतुर्वेदी, अभिषेक शर्मा, आकाश चतुर्वेदी, शितांशु त्रिपाठी (बबलू), शिशुपाल सिंह, पवन दीक्षित, सुभाष चंद्र शर्मा, आनंद मोहन शिवहरे, अरविंद शर्मा, प्रदीप मिश्रा, रोहित पचौरी, मोहन गुप्ता, आशुतोष त्रिपाठी, अरुण कुशवाह, मयंक गुप्ता, भोलू दीक्षित, अमित पचौरी, संतोष भारद्वाज, चंद्रप्रकाश मिश्रा, चंद्रशेखर उपाध्याय, सतीश शर्मा सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।

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