नगर निगम कोटा में जन्म–मृत्यु जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए आमजन को लंबे समय तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। तकनीकी जानकारी के अभाव और ऑनलाइन प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला विज्ञान नगर निवासी नीलम हीरानंदानी के परिवार के साथ सामने आया, जहां जन्म प्रमाण पत्र को डिजिटल करवाने के लिए आवेदक पिछले दो महीनों से नगर निगम के चक्कर काट रहा था। आज इस समस्या को लेकर चंबल फाउंडेशन के अध्यक्ष बृजेश शर्मा नीटू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल नगर निगम के हेल्पलाइन प्रभारी से मिला। इस दौरान पीड़िता के जीजा अविनाश नागवाणी भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वर्ष 1999 में बने जन्म प्रमाण पत्र के पंजीयन क्रमांक 502 पर ऑनलाइन पोर्टल खोलने पर पांच अन्य लोगों के प्रमाण पत्र दिखाई दे रहे थे, जबकि नीलम हीरानंदानी का नाम दर्ज नहीं था। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस समस्या की जानकारी हेल्पलाइन पर देने के बावजूद तीन बार शपथ पत्र बनवाए गए, लेकिन समाधान नहीं हुआ। हेल्पलाइन प्रभारी ने दस्तावेजों की जांच के बाद बताया कि उक्त क्रमांक पर दर्ज अन्य प्रमाण पत्र राजस्थान के अलग-अलग जिलों के हैं। इसके बाद मौके पर ही नई रसीद कटवाकर आवश्यक दस्तावेज लेकर पुनः ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किया गया। चंबल फाउंडेशन अध्यक्ष बृजेश शर्मा नीटू ने कहा कि इस प्रकरण से साफ है कि तकनीकी जानकारी के अभाव में आम आदमी को परेशान होना पड़ रहा है, जिसे दूर करने के लिए नगर निगम को बेहतर मार्गदर्शन और सहयोग की आवश्यकता है।


