नेता प्रतिपक्ष सिंघार का इंदौर महापौर भार्गव पर आरोप:कहा- महापौर कार्यालय में नोट गिनने की मशीन लगी; जल-प्रदूषण कांड बीजेपी की संवेदनहीनता का परिणाम

इंदौर के भागीरथपुरा में हुई 17 मौतों के बाद मंगलवार को पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा सहित कई कांग्रेस नेता पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने मीडिया से चर्चा करते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर गंभीर आरोप लगाए। सिंघार ने आरोप लगाते हुए कहा कि महापौर के कार्यालय में नोट गिनने की मशीन रखी हुई है। इसके साथ ही उन्होंने भागीरथपुरा वार्ड क्रमांक-11 में पेयजल में सीवेज मिलने से उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य संकट को लेकर भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही, देरी और असंवेदनशील शासन व्यवस्था का परिणाम है। महापौर की जो संवेदनशीलता होनी चाहिए वो नहीं मीडिया से चर्चा करते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि यहां की जनता ने हमेशा भाजपा को समर्थन दिया है। विधायक बने, पार्षद बने, महापौर बने। लेकिन मैं पुष्यमित्र भार्गव को जनता का महापौर नहीं कह सकता, वे पर्ची वाले महापौर हैं। इस मामले में जिस प्रकार की संवेदनशीलता होनी चाहिए थी, वह दिखाई नहीं देती। मुझे जानकारी मिली है कि उनके कार्यालय में नोट गिनने की मशीन लगी हुई है। सवाल यह है कि नोट गिनने की मशीन क्यों लगी है? क्या ठेकेदारों से नगद पैसा लिया जाता है, इसलिए मशीन रखी गई है, या फिर इसके पीछे कोई और कारण है? इसके साथ ही सिंघार ने इंदौर में दूषित पेयजल, ट्रैफिक अव्यवस्था और नगर निगम में भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आठ बार स्वच्छता का पुरस्कार पाने वाला इंदौर आज जहरीले पानी और बदहाल व्यवस्थाओं का शिकार हो चुका है। जल-प्रदूषण कांड भाजपा की संवेदनहीनता का परिणाम उमंग सिंघार ने कहा कि यदि इंदौर वास्तव में स्वच्छ होता, तो भागीरथपुरा में सीवेज मिला पानी पीने से लोगों की जान नहीं जाती। दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह से शुरू हुए इस जल-प्रदूषण कांड में अब तक 16 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, सैकड़ों लोग बीमार हैं और हजारों नागरिक प्रभावित हुए हैं। उन्होंने इस घटना को आकस्मिक नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही और देरी का परिणाम बताया। सिंघार ने स्पष्ट कहा कि मृतकों के परिजनों को दिए जा रहे दो लाख रुपए किसी भी तरह से पर्याप्त नहीं हैं। यह मुआवजा नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही से बचने का प्रयास है। कांग्रेस की मांग है कि प्रत्येक मृतक के परिजन को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए और पीड़ित मजदूर परिवारों की मजदूरी का भी भुगतान किया जाए। ट्रैफिक और नगर निगम पर भी उठाए सवाल नेता प्रतिपक्ष ने इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर कहा कि पूरा शहर जाम से जूझ रहा है। नौकरीपेशा लोग और स्कूली बच्चे समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में “सड़क खोदो, टेंडर लाओ और नया पेवर्स लगाओ” का एक नया सिस्टम चल रहा है, जिसमें भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने रहवासी संघों से भी सवाल किया कि वे अपने शहर और मोहल्लों के अधिकारों के लिए चुप क्यों हैं, जबकि टैक्स जनता दे रही है और नगर निगम परिषद घोटालों में लिप्त है। ड्रेनेज घोटाले का जिक्र उमंग सिंघार ने 2012 के कथित सवा सौ करोड़ रुपए के ड्रेनेज घोटाले का हवाला देते हुए कहा कि फर्जी बिलों के जरिए एक ही दिन में कई किलोमीटर ड्रेनेज लाइन डालने के दावे किए गए। उन्होंने पूछा कि 24 घंटे में पांच किलोमीटर ड्रेनेज लाइन कैसे डाली जा सकती है? उमंग सिंघार ने कहा कि मां अहिल्या की नगरी इंदौर ने भाजपा को हर स्तर पर समर्थन दिया, लेकिन बदले में शहर को उपेक्षा, अव्यवस्था और असंवेदनशील शासन मिला। कांग्रेस इन जनसमस्याओं के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती से संघर्ष जारी रखेगी। यह खबर भी पढ़ें… 17 मौतें और सिस्टम बेखबर…दूषित पानी पर हाईकोर्ट की फटकार ​​मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मंगलवार को दूषित पेयजल से जुड़े मामले में 5 याचिकाओं की एक साथ सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा- इस घटना ने इंदौर शहर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर अब दूषित पानी की वजह से पूरे भारत में चर्चा का विषय बन गया है। पढ़ें पूरी खबर…

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