ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी मे भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. अरुण शर्मा ने यूनिवर्सिटी में 35 अरब से ज्यादा का घोटाला होने का दावा किया है। सोमवार को फूलबाग में गांधी प्रतिमा पर मीडिया से चर्चा में उन्होंने यह जानकारी दी। शिकायतकर्ता अरुण शर्मा जान से मारने की धमकी मिलने कारण इतने डरे हुए हैं कि वह गांधी प्रतिमा के नीचे फूट-फूट कर रोने लगे। यह देखकर उनके साथ आए अन्य साथियों ने उन्हें समझा-बुझाकर शांत कराया। EOW ने शिकायत के बाद 19 प्रोफेसर पर की थी FIR आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. अरुण शर्मा ने पहले गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दो मिनट का मौन रखा। इसके बाद अपनी जान का खतरा बताते हुए जीवाजी यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. अविनाश तिवारी के इस्तीफे की मांग की। बता दें कि डॉ. अरुण शर्मा की शिकायत के बाद ही वर्षों से मुरैना जिले के झुंड पुरा में कागजों मे चल रहे शिवशक्ति कॉलेज की संबद्धता में फर्जीवाड़ा सामने आया था। जिसके बाद EOW ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. अविनाश तिवारी सहित 19 प्रोफेसर्स पर एफआईआर दर्ज की है। सरकारी फाइलों में छेड़छाड़ कर मिटा सकते हैं सबूत अरुण शर्मा का कहना है कि पिछले 14 सालों में जीवाजी यूनिवर्सिटी में 35 अरब, 64 करोड़, 60 लाख रुपए का महाघोटाला किया गया है। जिसके सभी सबूत उनके पास हैं। हाईकोर्ट में चल रही उनकी PIL में यह जानकारी भी वह कोर्ट के समाने रखेंगे। लेकिन जबसे उन्होंने मुरैना का फर्जीवाड़ा उजागर किया, तभी से उन्हें धमकी मिल रही है। ऐसे में डॉ. अरुण शर्मा ने मध्यप्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री से जीवाजी यूनिवर्सिटी में धारा 52 लगाने और कुलगुरु सहित 19 प्रोफेसरों को पद से हटाते हुए गिरफ्तार करने की मांग की है। डॉ. अरुण शर्मा का यह भी आरोप है कि पद पर रहते हुए यह सभी सरकारी फाइलों में छेड़छाड़ कर सबूत मिटा सकते हैं।


