प्रयागराज महाकुंभ में रविवार को आयोजित धर्म ज्योतिष महाकुंभ में अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा को ऐतिहासिक अवसर मानते हुए इसे “श्रीरामलला प्रतिष्ठा सम्वत” के रूप में घोषित किया गया। इस प्रस्ताव को सन्तों, विद्वानों और ज्योतिष शास्त्र के विशेषज्ञों का समर्थन मिला। जयपुर के पंचांग निर्माता आदित्यमोहन शर्मा ने बताया कि श्रीरामलला प्रतिष्ठा सम्वत का आरंभ पौष शुक्ल द्वादशी से हुआ है। इस सम्वत को विक्रम संवत की तर्ज पर देश के सभी पंचांगों में स्थान दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह कदम हिन्दू धर्म के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा, जो आने वाले हज़ारों सालों तक स्मरणीय रहेगा।” काशी की अखिल भारतीय विद्वत परिषद के डॉ. कामेश्वर उपाध्याय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. भगवतशरण शुक्ल जैसे विद्वानों ने भी इस घोषणा का समर्थन किया। पांडाल में उपस्थित सभी लोगों ने “जय श्री राम” और “हर हर महादेव” के नारों के बीच इसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया। महामंडलेश्वर पद्मनाभशरण देवाचार्य महाराज के प्रस्ताव पर स्वीकृति देते हुए हरिद्वार के स्वामी दामोदराचार्य महाराज और वृंदावन के स्वामी वृंदावनबिहारीदास महाराज ने इसे धर्म और परंपरा के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। इस अवसर पर आदित्यमोहन शर्मा ने कहा कि “अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा हिन्दू धर्म की अद्वितीय घटना है, और इसे सम्वत का रूप देना धर्म और ज्योतिष की प्राचीन परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रतीक है।”


