वहीं, बीते शुक्रवार को निगम कमिश्नर ने बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में चारों जोन के एटीपी ने लिखित सर्टिफिकेट देकर दावा किया कि उनके क्षेत्रों में कोई भी अवैध इमारत नहीं बनी है। लेकिन अगले ही दिन डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर ने 50 से ज्यादा अवैध इमारतों की सूची तैयार कर निगम कमिश्नर को सौंप दी और एटीपी पर अधिकारियों को गुमराह करने का आरोप लगाया। इसके बावजूद अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। समराला चौक के पास 2500 वर्ग गज में बनी अवैध इमारत का मामला भी ठंडे बस्ते में पड़ा है। यह मामला हाल ही में हुई निगम की जनरल हाउस मीटिंग में भी जोर-शोर से उठा था। पार्षदों ने आरोप लगाया था कि पक्के एटीपी की नियुक्ति करने के बजाय इंस्पेक्टरों और ड्राफ्ट्समैन को एडिशनल चार्ज देकर एटीपी बना दिया गया है। इन अधिकारियों पर आरोप हैं कि उनकी मिलीभगत से शहर में धड़ल्ले से अवैध इमारतें खड़ी की जा रही हैं। मंगलवार को विपक्षी पार्षदों ने इस मुद्दे को लेकर निगम कमिश्नर आदित्य डेचलवाल से मुलाकात की। पार्षद अरुण शर्मा, सोनू डीको, पार्षद पति इंद्रजीत इंदी और पार्षद पुत्र गुरप्रीत गोराया ने कमिश्नर को एक लिखित शिकायत सौंपी और चेतावनी दी कि यदि एडिशनल चार्ज पर तैनात एटीपी को नहीं हटाया गया, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। निगम कमिश्नर ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि जिन अधिकारियों को गलत तरीके से एटीपी का एडिशनल चार्ज दिया गया है, उन्हें जल्द इस जिम्मेदारी से हटाया जाएगा। भास्कर न्यूज | लुधियाना लोकल बॉडीज विभाग द्वारा जारी आदेशों की नगर निगम लुधियाना में खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है। विभाग ने 18 दिसंबर 2025 को निगम कमिश्नर को स्पष्ट हिदायतें जारी की थीं कि जिन अधिकारियों को एडिशनल चार्ज सौंपे गए हैं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाए। इसके बावजूद निगम की बिल्डिंग ब्रांच में आज भी ऐसे अधिकारियों को असिस्टेंट टाउन प्लानर (एटीपी) का चार्ज सौंपा गया है, जो इस पद के लिए अधिकृत ही नहीं हैं। निगम ने जोन-ए, जोन-बी, जोन-सी और जोन-डी में चारों जगह पर इंस्पेक्टरों या ड्राफ्ट्समैन को एटीपी का चार्ज सौंपा है। हैरानी की बात यह है कि लोकल बॉडीज विभाग के निर्देशों को दरकिनार करते हुए इन अधिकारियों को न सिर्फ एटीपी का एडिशनल चार्ज दिया गया है, बल्कि उन्हें वार्ड वाइज जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं। इन्हीं वार्डों में अवैध इमारतों और अवैध कॉलोनियों की भरमार हो चुकी है। कार्रवाई करने के बजाय कथित मिलीभगत के चलते शहर की रिहायशी गलियां कमर्शियल रूप ले चुकी हैं, जिससे हर इलाके में ट्रैफिक जाम की समस्या गंभीर होती जा रही है और आम लोग परेशान हैं।


