मध्य प्रदेश की स्टेट साइबर पुलिस ने 14 जनवरी को 12 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया था। उन्हें कोर्ट में पेश कर दो सप्ताह के रिमांड में हुई पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सतना निवासी आरोपी अनजर हुसैन ने दिल्ली, गुड़गांव, उत्तर प्रदेश, रायपुर, हरियाणा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सहित देश के कई राज्यों में अपनी गैंग फैलाई हुई है।
सूत्रों की मानें तो गुरुग्राम में एटीएस की कस्टडी में जान गंवाने वाले हिमांशु का इसी गिरोह से ताल्लुक था। वह गिरोह के लिए म्यूल अकाउंट ऑपरेट करने का काम करता था। ऐसे हुआ गिरोह का खुलासा
मार्च 2024 में सतना निवासी सुरक्षा गार्ड केके गौतम अपने एक दोस्त की शॉप पर पहुंचा। वहां उसे पता चला कि आधार कार्ड के जरिए भी बैंक बैलेंस पता किया जा सकता है। गौतम ने अपना आधार नंबर दोस्त को दिया। उसने चेक किया तो जानकारी मिली कि खाते में 1 लाख 9 हजार रुपए जमा थे।
गौतम ने अपने दोस्त को बताया कि उसके खाते में कभी इतने पैसे जमा नहीं थे। गौतम अपने खाते की जानकारी लेकर सतना के इंडसइंड बैंक पहुंचा और मैनेजर को जानकारी दी। सतना के ही आधा दर्जन से अधिक लोगों के खाते में भी करोड़ों रुपए का ट्रांसफर यूपीआई के जरिए होने की जानकारी सामने आई। इस तरह दिया जाता था ठगी को अंजाम लोन और सरकारी योजना के नाम पर ठगी
गैंग के एक्टिव मैंबर्स लोन दिलाने, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों से दस्तावेज लिया करते थे। फरेट एडिट कर इन दस्तावेजों के इस्तेमाल से फर्जी बैंक अकाउंट खोल लेते थे, उन्हीं खातों में साइबर ठगी की रकम पहुंचती थी। उसके बाद यूपीआई के इस्तेमाल से खातों से ठगी की रकम अरब देशों में ट्रांसफर की जाती थी।
बैंक अधिकारी, कर्मचारी इन खातों में करोड़ों रुपए आने के बाद भी पुलिस को सूचना नहीं देते थे। गैंग के सदस्य इसके एवज में बैंक कर्मचारियों को कमिशन दिया करते थे। साइबर पुलिस आरोपियों के बयानों की तस्दीक कर रही है। नेक्सिस से जुड़े कई अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी की जा सकती है। ठगी की राशि दुबई में कर देते थे ट्रांसफर
गैंग के सदस्य ग्रामीणों को चंद रुपए का लालच देकर उनका बैंक खाता किराये पर भी लेते, फिर इसके जरिए न सिर्फ देश बल्कि दुबई में भी करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन करते थे। हालांकि इस गिरोह का सरगना दिल्ली में बैठे एक व्यक्ति को बताया जा रहा है, जिसकी तलाश जारी है। स्टेट साइबर सेल का मानना है कि, इस गिरोह में सैकड़ों लोग हो सकते हैं। टेरर फंडिंग के एंगल पर भी चल रही जांच
मामले को एटीएस ने टेरर फंडिंग से जोड़कर डेढ़ साल पहले जांच शुरू की। एटीएस ने जांच में पाया कि ये साइबर फ्रॉड का मामला है। इसके बाद यह केस स्टेट साइबर सेल को ट्रांसफर किया गया। हालांकि एटीएस की जांच अब भी जारी है। ठगी में इस्तेमाल किए म्यूल अकाउंट
अपराधी किसी निर्दोष व्यक्ति के दस्तावेज से खाते खोल लेते हैं। किसी व्यक्ति को गुमराह कर उसके खाते का उपयोग करते हैं। दोनों स्थितियों में अपराध से ऐंठा गया पैसा रखकर अपराधी बैंक गए बिना ही राशि इधर से उधर करते हैं। इन खातों से पैसा कितनी बार, कहां ट्रांसफर हुआ यह पता करना मुश्किल होता है।
सूत्रों की माने तो साइबर ठगी का संदेही हिमांशु गिरोह में रहकर म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल कर रकम को इधर से उधर करने का काम करता था। हिमांशु की मौत ने धीमी की जांच की गति
7 जनवरी को ही मध्य प्रदेश एटीएस ने गुरुग्राम के फ्लैट में दबिश देकर 6 संदिग्धों को हिरासत में लिया था, जिसमें बिहार के मधेपुरा निवासी हिमांशु नाम के एक संदिग्ध की मौत हो गई। अन्य 5 को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि हिमांशु के गिरोह का मास्टरमाइंड सतना का रहने वाला मोहम्मद माशूक और साजिद खान हैं।
माशूक को गुरुग्राम और साजिद को सतना से गिरफ्तार किया गया था। एटीएस और साइबर पुलिस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने में जुटी हुई है, हालांकि गुरुग्राम में हिरासत में एक संदिग्ध मौत के चलते फिलहाल पूछताछ कमजोर पड़ गई। बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी
राज्य साइबर जबलपुर की एडिशनल एसपी रश्मि खरिया ने बताया कि- बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच कराई जा रही है। शुरुआती जांच में उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है। ये भी खबर पढ़ें… एटीएस की कस्टडी में 23 साल की हिमांशु की मौत हो गई हरियाणा के गुरुग्राम में 7 जनवरी को मध्यप्रदेश एटीएस की कस्टडी में बिहार के मधेपुरा के 23 वर्षीय हिमांशु की मौत हो गई। उसका बिल्डिंग से गिरने का वीडियो भी सामने आया है। एटीएस का कहना है कि उसने OYO होटल की तीसरी मंजिल से छलांग लगाई, जिससे उसकी जान चली गई। पढ़िए पूरी खबर। MP-ATS की कार्रवाई में बेटा खोने वाले पिता का दर्द हरियाणा के गुरुग्राम के सोहना में एक होटल की तीसरी मंजिल से गिरकर मंगलवार दोपहर बिहार निवासी हिमांशु (23) की मौत हो गई थी। वह मध्यप्रदेश में टेरर फंडिंग और साइबर क्राइम से जुड़े 6 आरोपियों में से एक था। एडीजी इंटेलिजेंस योगेश देशमुख ने मप्र एटीएस टीम के 9 सदस्यों को सस्पेंड कर दिया है। हरियाणा पुलिस ने भी ज्यूडिशियल जांच शुरू कर दी है। पढ़िए पूरी खबर।


