SGPGI में डॉक्टर भर्ती को लेकर बढ़ा विवाद:संस्थान के प्रोफेसर उठा रहे सवाल, फरवरी में खत्म हो रहा निदेशक का कार्यकाल

लखनऊ SGPGI में नए डॉक्टरों की भर्ती को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। संस्थान का फैकल्टी फोरम इसको लेकर अब मुखर होकर विरोध करने का मन बना चुका है। मौजूदा निदेशक का कार्यकाल फरवरी में पूरा हो रहा है। ऐसे में रिटायरमेंट के 3 माह पहले अधिकार सीज कर दिए जाते हैं। पर, निदेशक की ओर से अहम फैसले लिए जा रहे हैं। इसको लेकर संस्थान के कई डॉक्टर अब खुल कर विरोध कर रहे है। निदेशक के फैसलों को लेकर अब शासन से शिकायत करने की तैयारी भी है। इनको मिला था सेवा विस्तार SGPGI के पूर्व निदेशक डॉ.राकेश कपूर नवंबर 2019 में रिटायर हो गए थे। उनको राज्यपाल ने कुछ समय के लिए सेवा विस्तार दिया था। उसके बाद चंडीगढ़ SGPGI के हेपेटोलॉजी विभाग के प्रमुख रहे डॉ. राधाकृष्ण धीमन को SGPGI का जनवरी 2020 में निदेशक बनाया गया। निदेशक का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने से पांच वर्ष या 65 साल की उम्र तक होता है। अब निदेशक डॉ.आरके धीमन का कार्यकाल पूरा हो रहा है। फरवरी में वह रिटायर हो जाएंगे। 84 पदों पर निकाली गई है भर्ती SGPGI में निदेशक की ओर से रिटायरमेंट के 3 माह के अंदर प्रोफेसर से लेकर असिस्टेंट प्रोफेसर तक की भर्ती का विज्ञापन निकाला गया। करीब 22 विभागों में 84 पदों पर निकाले गए विज्ञापन को नियम विरुद्ध बताया जा रहा है। साथ ही इस विज्ञापन में निकाले गए पद आरक्षण के लिहाज से भी उचित नहीं है। ऐसे में भर्ती विज्ञापन निकाले जाने का विरोध भी संस्थान में शुरू हो गया है। कई प्रोफेसर, सीनियर डॉक्टर अब खुलकर निदेशक का विरोध करने के मूड में आ चुके हैं। उनका कहना है कि निदेशक को खुद ही अपने नियमों को ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में जल्द ही मुख्यमंत्री, शासन स्तर पर इसकी लिखित शिकायत करने की तैयारी है।

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