11 नवंबर से गायब नाबालिग के मामले में हाई कोर्ट में उसके पिता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुरानी छावनी थाने से केस डायरी मंगाने 30 मिनट का समय दिया। पता चला कि एसआई देशराज सिंह केस डायरी लिए कोर्ट में ही थे। मात्र एक मिनट में केस डायरी लेकर पहुंच गए। फिर कोर्ट ने एसएसपी धर्मवीर सिंह को तलब किया। आने के लिए 30 मिनट दिए लेकिन वे 15 मिनट में ही कोर्टरूम में आ गए और उन्होंने माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि सात दिन में नाबालिग को ढूंढ लेंगे। वहीं किशोरी की गुमशुदगी के मामले में विवेचना में लापरवाही बरतने और न्यायालय में प्रकरण की सुनवाई में गलत आचरण किए जाने पर एसएसपी ने एसआई व हवलदार को निलंबित कर दिया। ऐसे समझें पूरा मामला डीडी नगर निवासी पिता ने 24 नवंबर को पुरानी छावनी थाना में एफआईआर दर्ज कराई, आरोप लगाया कि मुकेश धानुक ने नाबालिग बेटी को बंदी बना लिया है। 11 नवंबर से बेटी लापता है। पुलिस जब ढूंढ नहीं पाई तो कोर्ट में याचिका लगाई। 17 दिसंबर को कोर्ट ने पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी। सुनवाई से ठीक पहले याची के एडवोकेट पल्लव त्रिपाठी को स्टेटस रिपोर्ट दी गई। उन्होंने आपत्ति जताई, कहा कि 16 नवंबर को युवक की मोबाइल लोकेशन फिरोजाबाद मिली। 29 नवंबर को पुलिस वहां पहुंची। युवक की मां ने कहा कि बेटा आया था। साथ में एक लड़की थी । दो दिन रुका और फिर चला गया। अपनी पीठ मत थपथपाएं मामले की जांच में बरती जा रही लापरवाही पर कोर्ट ने जब नाराजगी जताई तो एसएसपी ने कहा कि प्रधान आरक्षक काम में बहुत कुशल हैं। इस पर कोर्ट ने एसएसपी के समक्ष ही जांच में बरती जा रही लापरवाही उजागर करना शुरू कर दीं। इस पर एसएसपी ने माफी मांगी। फिर एसएसपी की ओर से आंकड़े पेश किए, बताया कि इतनी नाबालिग को पुलिस ढूंढने में सफल रही है। कोर्ट ने इस पर कहा कि अपनी पीठ खुद ही मत थपथपाएं। बिना नेम प्लेट के कोर्ट में पहुंचे एसआई हाई कोर्ट ने पुलिस को केस डायरी पेश करने के लिए कहा। एसआई देशराज सिंह केस डायरी लेकर पहुंचे। सवाल-जवाब शुरू हुआ ही था कि कोर्ट ने एसआई से नेम प्लेट के बारे में पूछ लिया। एसआई ने जैकेट की चैन खोलने का प्रयास किया, ताकि नेम प्लेट दिखा सकें। लेकिन तब तक मामला बिगड़ चुका था। कोर्ट में एसआई के इस तरह से आने और इस प्रकार से व्यवहार करने पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। जानकारी के लिए स्टाफ साथ रहता है क्या कोर्ट ने जब केस के संबंध में सवाल पूछे तो एसआई ने प्रधान आरक्षक प्रकाश शर्मा से जानकारी मांगी। इस पर कोर्ट ने तंज कसा , कहा कि इतने बड़े अधिकारी हो गए हो कि जानकारी देने के लिए स्टाफ साथ रहता है। इस पर उन्हें बताया गया कि केस की जांच प्रधान आरक्षक ही कर रहे हैं। प्रधान आरक्षक से जब कोर्ट ने रोजनामचा मांगा तो वह मोबाइल निकालने लगे। इस पर कोर्ट ने सरकारी वकील से एसएसपी को 30 मिनट में बुलाने के लिए कहा।


